अपने बच्चों को सकारात्मक तरीकों से अनुशासित जीवन जीना सिखाने के कुछ सरल उपाय?

अपने बच्चों को सकारात्मक तरीकों से अनुशासित जीवन जीना सिखाने के कुछ सरल उपाय?

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अपने वंश को आगे बढ़ाने हेतु बच्चों को जन्म देकर हमारी जवाबदेही खत्म नहीं होती । एक जनक के रुप में उनकी शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, भौतिक और आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ती करना ना केवल हमारी प्राथमिक जवाबदारी होती है, किंतु उनमें समोचित जीवन मूल्यों और नैतिक गुणों के विकास को सुनिश्चित् करना और अवगुणों से बचाना भी हमारा फ़र्ज है।
हमारा सदैव यह प्रयास होना चाहिए कि हमारे बच्चे अपने सद्गुणों के कारण समाज के लिए सौगात बने ना कि बोझ।
जीवन की इस आपाधापी, बढ़ते तनाव, रिश्तों में कम होती मिठास और खत्म होते संवाद के बीच संतुलन बनाकर आइये हम अपने बच्चों में सकारात्मकरुप से अनुशासन (DISCIPLINE) का विकास करें।

D – Distract from wrong & engage in good act.
(अवगुणों से रक्षा कर, सद्गुणों का विकास करें।)
I – Inculcate moral values.
(जीवन में नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करें।)
S – Structure the environment to fulfill Child’s Physical/ Emotional needs.
(बच्चों के समोचित शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास हेतु अनुकूल वातावरण उत्पन्न करने का प्रयास करें।)
C – Judicious use of Carrot/ Stick. (Avoid Aggressive Behavior)
( बच्चों के सर्वश्रेष्ठ विकास हेतु आवश्यकतानुसार साम, दाम, दंड, भेद नीतियों का उपयुक्त उपयोग करें।)
I – Instruct but do not compel. Authoritative behavior leads to rebel.
( उन्हें सही-गलत, उचित-अनुचित का भेद करना सिखाएं। जीवन में सही निर्देश दें, किंतु हमारी तानाशाही उनके व्यवहार में विद्रोह उत्पन्न कर सकती है। उन्हें उनके विचार व्यक्त करने, सही निर्णय लेने और उनका अनुसरण करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।)
P – Play & Connect. Use multimodality interactions.
(खेल, संगीत, कला, चित्रकारी इत्यादि गतिविधियों के माध्यम से आपसी संवाद स्थापित करने का प्रयास करें।)
L – Let them learn to live peacefully and let others to live in peace.
(‘जीयो और जीने दो’ का मूल मंत्र उन्हें शांतिमय और तनावमुक्त जीवन जीने में सहायता करेगा। उन्हें समाज के साथ सकारात्मक समन्वय बिठाने की कला सिखाना हमारा फ़र्ज है। और वह यह तभी सीखेंगें जब वे वास्तिविकता में अपने परिवार में आपसी भाई-चारा, शांति, प्रेम और त्याग का अनुसरण देखेंगें)
I – Ignore when possible. Critical environment result in Depression & Guilt.
(अकारण छोटी-छोटी गलतियों पर सदैव मीन-मेक ना निकालें। लगातार टोकने से उनमें अवसाद और आत्मग्लानि घर कर जाती है।)
N – Never put your children down in front of others. This may break their self-confidence and break the bond of love between you and child.
(दूसरों के सामने अपने बच्चों का अकारण डाँट कर या हास्य बनाकर नीचा ना दिखाएं। इससे ना केवल उनमें आत्म-विश्वास की कमी आती है किंतु संबंधों में मधुरता और आपसी प्रेम का भी पतन होता है।)
E – Explore the innocent world of children with soft heart.
(अपने बच्चों की मासूम, निष्कपट दुनिया को सहृदय मन से देखने का प्रयास करें। अपनी निष्ठुरता से उनकी कोमल भावनाओं को ठेस ना पहुँचाएं।

आइये हम सब मिलकर अपने बच्चों को जीवन जीने की वह अद्भुत कला सिखाएं और ऐसा अनुकूल और सुखद वातावरण प्रदान करें जिनमें उन्हें संयमित, नैतिक जीवन जीने की अभिलाषा भी हो और स्वतंत्रता भी।

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