आओ मनायें नारी दिवस, रोज मनायें नारी दिवस।

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बहुत हो गई राजनीति, महिला बिल के नाम पर।
कसक रही क्यों हर महिला घर, समाज या काम पर?
नहीं सुरक्षित बेटियाँ, माँ की ही कोख में,
जल रही बहुँए आज भी क्यों दहेज के नाम पर।

ट्वीटर, फेसबुक, वाट्स-एप पर नारी महिमा गाते हैं।
लंबे-लंबे वाचनों में खूब सम्मान जतातें हैं।।
देख पराई वनिता को सब संस्कार भूल जाते हैं।
घर जाकर सब भूल अपनी बीबी पर हुकुम चलाते हैं।।

गर माँ का ऋण चुकाना है, जीवन में कुछ कर जाना है, तो ले प्रण…….
न रहे कोई माँ बेबस, प्राण ना आश्रम में छूटे।।
किसी बहन बेटी की अस्मत सड़कों पर ना कोई लूटे।।
दहेज के नाम पर, प्रताड़ना ना हो कभी।
भ्रूण हत्या के नाम पर ना कोई बेटी छूटे।

आओ कुरीतियों की होली जलायें, नारी दिवस कुछ यूं मनायें।

-डॉ सचिन गोठी
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