क्या प्रसव के उपरांत कान खुले रखने से हवा अंदर शरीर में भर जाती है  ? (Does after delivery air fills inside the body through ear?)

क्या प्रसव के उपरांत कान खुले रखने से हवा अंदर शरीर में भर जाती है  ? (Does after delivery air fills inside the body through ear?)

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भारतीय मान्यता-

प्राचीन भारतीय संस्कृति के मुताबिक प्रसूता को अपने कान बांध कर रखने चाहिए ताकि उसके शरीर में बाहरी हवा प्रवेश ना कर सके और उसका शरीर ना फूले।

तथ्य-

बाह्य व मध्य कर्ण के बीच एक पर्दे की भित्ति होती है। यह हवा के दाब को संतुलित बनाए रखती है, श्रवण करने में मदद करती है और अंदर संक्रमण के प्रवेश को रोकती है। अतः जब तक पर्दे फटा ना हो हवा अंदर प्रविष्ट नहीं हो सकती।

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ear drum

कान ढकने की मान्यता के पीछे संभव कारण

प्राचीन काल में महिलाओं को सामाजिक प्रथा के अनुरूप घुंघट में रहना पड़ता था। जिससे कोई भी गैर मर्द उन्हें बुरी नजर से ना देख सके।

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किंतु घुंघट में माँ को ना केवल नवजात शिशु की देखरेख एवं परवरिश में असुविधा होती, वरन् अगर शिशु को कोई खतरा होगा तो वह समय रहते पहचान भी नहीं पायेगी।

अतः हमारे बुजुर्गों ने शालीनता के पर्याय घुंघट के स्थान पर महिला के कान बांधने का यह तरीका निकाला जिससे सामाजिक प्रथा को ठेस पहुंचाए बिना मकसद भी पूरा हो जाए और माँ को नवजात की समोचित देखरेख में असुविधा भी ना हो।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 


 

Does after delivery air fills inside the body through ear?

Indian Myth-

Since time immemorial the puerperal mothers are advised to cover their ears after delivery to prevent entry of air into the body and bloating.

Fact-

There is a tympanic membrane between the outer and middle ear. It maintains air pressure balance between the two, aids hearing and prevents the ingress of contamination. So as long as it is intact, the air cannot enter the body through it!

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What might be the possible reason behind the recommendation to cover the ears –

In ancient India, Parda pratha (Covering the face lower down with Ghungat) was a social practice to ensure the safety of females from molestation.

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Ghungat was not only nuisance and uncomfortable to mothers, but it used to interfere in newborn care too. Also, in cases of emergency, the mother would not be able to recognize in time and act fast to safe guard the baby.

So our elders logically proposed to replace the Ghungat with a cover on head and ears to aid in baby care without interfering with the sanctity of rituals and social beliefs.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.