गर्भावस्था और कमर दर्द। (Back Ache During Pregnancy)

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अधिकांश महिलाऐं गर्भावस्था में कभी ना कभी कमर दर्द से ग्रसित रहती हैं। साधारणतः गर्भाधान के परिवर्तनों के कारण होने वाला दर्द सहनीय होता है। वहीं असहनीय दर्द गंभीर अवस्था का संकेतक हो सकता है।

spinal changes

विकासशील शिशु द्वारा गर्भाशय की दीवार पर खिंचाव, बढ़ते वजन से मेरूदंड व कुल्हों के जोड़ों व अस्थि-बंधन पर बढ़ता तनाव, मेरूदंड की संरचना में परिवर्तन से नसों पर बढ़ते दबाव, मांसपेशियों व स्नायुतंत्र पर खिंचाव इत्यादि के कारण कमर दर्द गर्भावस्था का साधारण लक्षण हो सकता है। अतः कमर दर्द होने पर गर्भपात का अकारण भय मानसिक तनाव पैदा कर सकता है।

किंतु असहनीय तीव्र कमर व पेट दर्द अपरिहार्य गर्भपात (Threatened or Inevitable Abortion) , अस्थानिक गर्भावस्था (Ectopic Pregnancy), यौन संक्रमण, मूत्र रोग, पथरी, आंत के रोग या मेरूदंड की नसों पर अत्याधिक दबाव के कारण हो सकता है।

कमरदर्द से निपटने के साधारण उपायः-

Tadasana-Mountain-Pose

• नियमित व्यायाम – पैदल चलने, तैरने व हल्के व्यायाम विशेषकर वे व्यायाम जो मेरूदंड की मांसपेशियों की ताकत बढ़ाते हैं, करने से कमर दर्द में राहत मिलता है। व्यायाम करते समय उन अवस्थाओं जिनमें गिरने का भय हो ना करें।
• दूध व कैल्शियम युक्त भोजन उपयुक्त मात्रा में करें व कैल्शियम व विटामिन डी का सेवन चिकित्सक द्वारा बताई गई मात्रा में अवश्य करें।
• दैनिक प्रातः व सांयकालीन कौली धूप में टहलने से शरीर में पर्याप्त विटामिन डी निर्मित होता है व कमर दर्द में भी आराम मिलता है।
• गर्म या ठंडा सेक आरामदायक हो सकता है।
• दर्द निवारक दवाईयों का सेवन बिना स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह के वर्जित है। बाम लगा सकते हैं किंतु स्प्रे का प्रयोग कार्बन फ्लोरो कार्बन के कारण हानिकारक हो सकता है। कड़क हाथ से मालिश करने से मेरुदंड के गुटके खसकने से स्पाँडलिसिस होने का खतरा होता है।
• चलने, उठने, बैठने और लेटने की मुद्रा में सुधार आवश्यक है।
• लंबे समय चित्त लेटने से भी कमर दर्द बढ़ता है। बिस्तर पर पूर्णतः आराम माँ व शिशु दोनों के लिए ही हानीकारक साबित हो सकता है। अतः चिकित्सीय सलाह से हल्के व्यायाम अवश्य करें।
• जमीन से सामान उठाते समय कमर को सीधी रख घुटने मोड़ कर वजन उठाऐं।

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• ऊँची हील की सैंडलों का प्रयोग ना करें।
• हल्के आरामदायक कपड़े पहनें।
• आरामदायक बिस्तर पर ही सोंऐं।
• कुर्सी पर बैठते समय रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। कमर के पीछे सहारा देकर बैठें।
• टेलिविज़न देखते समय अपनी मुद्रासन का विशेष ध्यान रखें।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 


Back Ache During Pregnancy

Most women suffer from back ache during pregnancy. The back ache caused due to the physical and hormonal changes in pregnancy is usually tolerable. However, intense pain may indicate a pathology.

spinal changesSpinal Changes in Pregnancy

The hormonal changes in pregnancy leads to the laxity of vertebral column and hip joints, muscles and ligaments. To accomodate the growing fetus, distended abdomen shifts the center of gravity ventrally, thereby changing the axis of vertebral column. This leads to strain on the spinal nerves, resulting in lower back ache.

Back ache cause fear of miscarriage in the pregnant mother. However,  it is not always true.

Lower back ache in association with abdominal cramps may be due to the threatened or inevitable abortion, ectopic pregnancy, genito-urinary infections, appendicitis, bowel disease or spondylosis.

How to cope up with lower back ache?

 Tadasana-Mountain-PoseTadaasn-Mountain yoga

  • Do regular exercises such as – walking, steps, swimming and light exercise, especially back strengthening exercises under appropriate supervision. The exercises increase the muscular strength, relaxes joints and relieve pain.
  • Do not attempt those exercises that require bending forward leading to intraabdominal pressure, or the ones that require balance, that may result in fall.
  • Milk is rich in Calcium and Vitamin D, hence it should be taken even in postpartum period.
  • Vitamin D is synthesized in our body from the subcutaneous cholesterosl on exposure to sunlight, hence sunbath for 15 – 20 minutes is recommended.
  • Hot and Cold fomentation can be beneficial.
  • Do not use any painkillers (Analgesics) without the supervision of the Obstetrician.
  • Gentle massage with balm is advisable, but donot do hard massage, as it risks spondylosis. Avoid pain sprays, as they contain Carbon Fluoro Carbon (CFC), which may harm the baby.
  • Improve the posture while walking, lifting, sitting and lying down position.
  • Sit straight on chair, with a back rest.
  • Strict bed rest and lack of physical exercises may worsen the back ache. Hence, strict bed rest in pregnancy should only be offered, when there is risk to the mother or fetus.
  • Improve postures while lifting the weight as shown-

liftings

• Do not use high-heeled sandals.
• Wear lightweight, comfortable clothing.
• Sleep on comfortable beds.
• Give proper support and back rest while sitting.
• Use correct postures while watching television.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.