गर्भावस्था में खून की कमी – रक्ताल्पता / अनीमिया। (Anemia In Pregnancy)

गर्भावस्था में खून की कमी – रक्ताल्पता / अनीमिया। (Anemia In Pregnancy)

anemia

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विभिन्न सरकारी आकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 60 – 70 प्रतिशत गर्भवति महिलायें खून की कमी से ग्रसित होती हैं। उनमें से अधिकांशतः  पोषण के अभाव में या अत्याधिक मासिक स्त्राव के कारण गर्भाधान पूर्व ही रक्ताल्पता से पीड़ित होती हैं और गर्भावस्था में अतिरिक्त आवश्यकता के कारण उनकी तकलीफ बढ़ जाती है।

गर्भाधान रक्तानुकरण (Hemodilution Of Pregnancy)

गर्भावस्था में माँ एवं शिशु के लिए आवश्यक अतिरिक्त तत्वों की पूर्ति एवं उत्पन्न अवयवों के उचित निष्कासन के लिए रक्त की मात्रा 5 लिटर से बढ़कर लगभग 6.5 लिटर तक हो जाती है। किंतु यह वृद्धि असंतुलित अनुपात में होती है। लाल रक्त कोशिकाओं के 30 प्रतिशत वृद्धि के अनुपात में प्लाज़्मा में लगभग 40 प्रतिशत बढ़ोतरी होती है ताकि, तरल रक्त सरलता से भ्रूण तक प्रवाहित हो सके।

अतः गर्भावस्था में घनत्व कम होने के कारण कुछ हद तक खून की कमी सामान्य है। इसे गर्भाधान रक्तानुकरण (Hemodilution Of Pregnancy) कहते है।

वैकारिक रक्ताल्पता (Anemia In Pregnancy)

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा के अनुसार यदि, रक्त का घनत्व व हीमोग्लोबिन की मात्रा 10 ग्राम प्रतिशत, लोहित कण संख्या 3.2 मिलियन प्रति क्यूबिक मि.मी. तथा पी.सी.वी. 30 प्रतिशत से कम हो तो उसे वैकारिक रक्ताल्पता, पाण्डु या रक्त की कमी (Anemia In Pregnancy) कहते हैं। अविकसित व विकासशील देशों में लगभग दो-तिहाई गर्भवती महिलायें गर्भावस्था में रक्ताल्पता से पीड़ित होती हैं।

रक्ताल्पता को हीमोग्लोबिन के अनुपात में एवं गंभीरता के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है।

अल्प

8-10 gm%

मध्यम

6.5-8 gm%

गंभीर

<6.5 gm%

वैकारिक रक्ताल्पता के सामान्य लक्षण –

अधिकांशतः महिलाओं को मन्दाग्नि, दुर्बलता, शिथिलता, भूख कम लगना, ग्लानि, भ्रम, चक्कर आना, घबराहट, हाँफना, जल्दी थक जाना, श्वास लेने में तकलीफ होना व साँस फूलना इत्यादि तकलीफ होती है। रक्ताल्पता अत्याधिक होने पर हृदय, मस्तिष्क व अन्य महत्वपूर्ण अंगों के क्रियांवन में कमी आने के कारण परेशानी बढ़ सकती है।

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वैकारिक रक्ताल्पता के मुख्य कारणों का वर्गीकरण:-

  • निर्माण तत्वों की कमी (Nutritional Anemia)

हीमोग्लोबिन निर्माण में मुख्यतः ग्लोबिन नामक प्रोटीन (Globin Protein), लौह (Iron), विटामिन बी-12(Vitamin B12) व फोलिक एसिड (Folic Acid), विटामिन सी (Vitamin C) एवं किडनी द्वारा निर्मित एरिथ्रोपोयेटिन (Erythropoietin) नामक अंतःस्त्राव की आवश्यकता होती है। अन्य खनिज़ जैसे ताम्र, कोबाल्ट, यषद इत्यादि अत्यल्प मात्रा में आवश्यक होते हैं। इनमें से किसी भी तत्व की कमी, अधिक आवश्यकता तथा अल्पपूर्ति के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो सकती है।

लगभग 50 – 70 प्रतिशत महिलाओं में रक्ताल्पता का कारण लौह तत्व, विटामिन बी12 एवं फोलिक एसिड की कमी होती है।

2- निर्माण प्रकिया में त्रुटि (Abnormal Haematopoesis)

कई परिवारों में अनुवांशिक गुणसूत्र संबंधी (Chromosomal) या उन पर स्थित कणों (Genes) के विकार के कारण हीमोग्लोबिन निर्माण दोषपूर्ण होता है, जैसे कि थैलेसिमिया (Thallesemia) व सिकल सेल (Sickle Cell Disease) की बिमारी।

कई बार कर्करोग (Blood Cancer) या विषाणु के संक्रमण (Viral Infections like Parvo Virus B19)  के कारण अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में रक्त कोशिकाओं के निर्माण में अवरोध (Aplastic Anemia) पैदा होने के कारण भी खून की कमी हो सकती है।

  • रक्त स्त्राव (Hemorrhage)

पाचन तंत्र में छाले (Oral, Gastric, Intestinal Ulcers), कृमि संक्रमण जैसे हुक वर्म (Worm Infestations like Hook worm), बवासीर (Hemorrhoids or Piles) या योनि से रक्त स्त्राव जैसे गर्भाधानपूर्व अधिक मासिक स्त्राव के कारण या गर्भावस्था में कनेरी से रक्त स्त्राव (Bleeding Per Vaginum – Preconceptional Menorrhagia or Antepartum hemorrhage)  के कारण भी रक्त में खून की कमी हो सकती है।

  • रक्त-क्षरण (Hemolysis)

अनुवांशिक रक्त कोशिकाओं के विकार जैसे स्फीरोसॉयटोसिस (Hereditary Spherocytosis), थैलेसिमिया (Thallesemia), सिकल सेल रोग (Sickle cell disease) या फिर मलेरिया (Malaria) या विषाणु (Viral) के संक्रमण (Infections) इत्यादि के कारण रक्त कोशिकाओं का जिगर (Liver)  व तिल्ली (Spleen) में क्षरण (Hemolysis) भी रक्ताल्पता का कारण हो सकते हैं।

  • अन्य कारण (Others)

दीर्घकालीन रोग (Chronic Disease) जैसे क्षय रोग (Tuberculosis), गुर्दा रोग (Chronic Kidney disease), जिगर की खराबी (Hepatic Failure) इत्यादि भी विभिन्न कारणों से रक्ताल्पता पैदा करते हैं।

अति रक्ताल्पता का गर्भवति माता पर दुष्प्रभाव-

  • समयपूर्व प्रसव (Preterm Labour) ।
  • अल्प-विषरक्तता (Pre-Eclampsia) ।
  • संक्रमण (Infections) ।
  • संक्षोभ (Shock) ।
  • कनेरी विच्छेद (Abruptio Placentae) ।
  • हृदयघात (Congestive Cardiac Failure) ।

अति रक्ताल्पता का शिशु पर दुष्प्रभाव-

IUD

  • शिशु का मंद विकास (Intrauterine Growth Retardation) ।
  • समय पूर्व जन्म (Premature Birth) ।
  • गर्भस्थ शिशु की आकस्मिक मृत्यु (Sudden Intrauterine Fetal Death) ।
  • नवजात शिशु में अल्परक्तता (Neonatal Anemia) ।
  • अधिक शिशु मृत्यु दर (High Perinatal Mortality) ।

गर्भावस्था में अतिअल्परक्तता रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव:-

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  • बाल्यावस्था, किशोरावस्था एवं गर्भाधान पूर्व में उचित स्वास्थप्रद पोषण।
  • कृमि व अन्य संक्रमण से बचाव।
  • गर्भाधान पूर्व चिकित्सीय परिक्षण व परिचर्चा।
  • गर्भाधान पूर्व लगभग तीन माह पूर्व से ही फोलिक एसिड की दवाईयों का सेवन।
  • अत्याधिक मासिक स्त्राव का त्वरित निराकरण।
  • रक्ताल्पता संबंधित अनुवांशिक रोग की स्थिति में गर्भाधान पूर्व व पश्चात् अनुवांशिकी विषयक परामर्श।
  • गर्भावस्था के दौरान आयरन की गोलियों का सेवन या चिकित्सीय सलाह पर आयरन के इंजेक्शन।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



Anemia In Pregnancy

According to various Government institutes, it is the most common disease in pregnancy, affecting approximately 60-70% of pregnant mothers in India. Most of them suffer from anemia preconception either due to nutritional deficiency or due to heavy blood loss in menstruation. Their symptoms are unmasked due to increased requirements in pregnancy.

Hemodilution Of Pregnancy:

During pregnancy the metabolic requirement of growing fetus and host mother is very high. The baby is entirely dependent on mother for both, its nutritional requirements and excretion of wastes.

To facilitate increased blood supply to the baby, there is increased demand on mother’s heart and circulatory system. The maternal blood volume increase from 5 liters to 6.5 liters. However, this rise is not synchronized amongst various blood components.

The volume of liquid plasma rises by 40-50%, as against 30-40% increase in Red blood cells, resulting in lower viscosity of blood to facilitate easy blood flow. This adaptive phenomenon is called as Hemodilution of Pregnancy.

But, if the hemoglobin drops below 10gm% then it is considered as Anemia and requires intervention.

Anemia In Pregnancy:

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According to World Health Organization, the anemia in pregnancy is defined as the concentration of hemoglobin less than 10 gm%, RBC count less than 3.2 million/cu.mm. Or Pack cell volume less than 30%.

Around 2/3rd pregnant mothers in underdeveloped and developing world suffer from Anemia in Pregnancy.

Classification of Anemia in Pregnancy!

Mild

8-10 gm%

Moderate

6.5-8 gm%

Severe

<6.5 gm%

Symptoms of Pathological Anemia:

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Classification of Anemia according to Cause:

  • Nutritional anemia-

Hemoglobin synthesis requires Globin protein, Iron, Vitamin B12, Folic acid, Vitamin C, Erythropoietin hormone produced from kidneys along with minerals. Deficiency of any of these raw materials in our diet may result in nutritional anemia.

The most common cause of anemia is deficiency of Iron, Vitamin B12 and Folic acid affecting around 50-70% females.

  • Abnormal Hematopoiesis (Production of Blood )
  • Hereditary chromosomal and genetic diseases like Thallesemia and Sickle cell disease may result in abnormal production of hemoglobin resulting in familial anemia.
  • Blood cancers, viral infections like parvovirus B19, chemotherapy etc. may adversely affect the bone marrow resulting in abnormal production of blood components called Aplastic Anemia.
  • Hemorrhage:
  • The second most common cause of anemia in females is untreated heavy menstrual bleeding.
  • Bleeding from digestive tract (Oral, Gastric, Intestinal Ulcers), worm infestations, piles etc.
  • Hemolysis (Blood cells destruction):
  • Hereditary chromosomal and genetic disorders leading to production of red blood cells with abnormal size, shape and quality may result in destruction. Eg. Hereditary spherocytosis, Thallesemia, Sickle cell disease etc.
  • Malaria or Viral infections.
  • Swelling of liver or spleen.
  • Other causes:
  • Chronic diseases such as Tuberculosis, Chronic kidney disease, Liver failure etc.

Side effects of Anemia on Mother:

  • Preterm labor
  • Pregnancy induced hypertension.
  • Frequent infections.
  • Shock
  • Separation of placenta from its bed (Abruptio Placeta).
  • Heart failure.

Side effects of Anemia on Fetus:

IUD

  • Intrauterine growth retardation.
  • Premature birth.
  • Sudden intrauterine fetal death.
  • Neonatal anemia.

Some suggestions to prevent Anemia in Pregnancy!

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  • Promote healthy diet and life style in adolescence and pre-pregnancy.
  • Prevent worm infestations and infections.
  • Preconception counseling.
  • Preconception folic acid intake, at least for 3 months.
  • Address abnormal uterine bleeding and heavy menstruation.
  • Genetic counseling and screening to prevent hereditary disorders.
  • Take iron tablets and injectables during pregnancy under supervision of Doctor.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.