गर्भावस्था में थायराईड ग्रंथी की समस्या। (Thyroid Disorders in Pregnancy)

गर्भावस्था में थायराईड ग्रंथी की समस्या। (Thyroid Disorders in Pregnancy)

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गर्भावस्था में शिशु व माँ के बहुआयामी उचित विकास को सुनिश्चित करने के लिए थॉयराईड ग्रंथी द्वारा निर्मित अंतःस्त्राव थॉयराईड हार्मोन की आवश्यकता बढ़ जाती है। इसकी आपूर्ती के लिए ईस्ट्रोजन व ह्यूमन कोरियोनिक गोनेडोट्रोपिन (Human Chorionic Gonadotropin) नामक हार्मोन के प्रभाव में थॉयराईड ग्रंथी का आकार, रक्त प्रवाह, हार्मोन निर्माण व उसके मुक्त घटक का प्रवाह बढ़ जाता हैं।

प्रथम तिमाही में शिशु पूर्णतः माँ द्वारा निर्मित हार्मोन पर निर्भर होता है। किंतु तद्पश्चात उसकी स्वयं की ग्रंथियाँ उचित मात्रा में निर्माण करने लग जाती हैं। किंतु फिर भी वह उपादान तत्वों जैसे आयोडीन व प्रोटीन के लिए माँ पर आश्रित होता है।

गर्भावस्था में थायराईड उत्तेजक अंतःस्त्राव की रक्त में सामान्य मात्रा-

मस्तिष्कतल में उपस्थित अग्रवर्ती पीयूष ग्रंथी (Anterior Pituitary) थायराईड ग्रंथी की क्रियाशीलता उत्तेजित करने वाला हार्मोन टी.एस.एच (Sr. TSH) उत्पन्न करती है, जो कि थायराईड ग्रंथी की क्रियाशीलता को नियंत्रित करती है।

थायराईड ग्रंथी की निष्क्रियता की स्थिति में रक्त में इसकी मात्रा बढ़ जाती है, वहीं अतिउत्तेजना की अवस्था में इसकी मात्रा सामान्य से कम होने लग जाती है।

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थायराईड हार्मोन की अल्पता (Hypothyroidism):-

गर्भावस्था में लगभग 5 से 10 प्रतिशत महिलायें थॉयराईड हार्मोन की कमी से ग्रसित होती हैं।

गर्भावस्था में थायराईड हार्मोन की अल्पता का कारण या तो माँ एवं शिशु की अधिक आवश्यकता या थायराईड ग्रंथी की निष्क्रियता हो सकती है। कारण जो भी हो, थायराईड ग्रंथी को उत्तेजित करने के लिए, मस्तिष्कतल में उपस्थित अग्रवर्ती पीयूष ग्रंथी (Anterior Pituitary) थायराईड ग्रंथी की क्रियाशीलता उत्तेजित करने वाला हार्मोन टी.एस.एच (Sr. TSH) अधिक मात्रा में उत्पन्न करती है। गर्भावस्था में थायराईड हार्मोन की अल्पता की स्थिति में Sr. TSH की रक्त में मात्रा बढ़ जाती है।

थायराईड हार्मोन की अल्पता के लक्षण

सामान्यतः थॉयराईड हार्मोन की अल्पता के लक्षण मोटापा, थकान, अनियमित मासिक धर्म, गर्भाधारण में समस्या, अवसाद, बालों का झड़ना, रूखी त्वचा, पैरों में सूजन, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या कॉलेस्ट्रोल का बढ़ना इत्यादि हैं।

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थायराईड हार्मोन की अल्पता का माता पर दुष्प्रभाव-

  • गर्भपात।
  • समयपूर्व प्रसव।
  • गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप।
  • गर्भावस्था प्रेरित शर्करा।
  • पुनर्रावृर्ती यौन संक्रमण।
  • प्रसव पश्चात अत्याधिक रक्तस्त्राव।
  • रक्ताल्पता।

थायराईड हार्मोन की अल्पता का शिशु पर दुष्प्रभाव-

 

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थायराईड हार्मोन की अल्पता के कारण –

  • आवश्यक उपादक तत्वों जैसे आयोडीन या प्रोटीन की कमी।
  • ग्रंथियाँ की निष्क्रीयता।
  • स्वघाती प्रतिरक्षक तत्वों (Autoimmune Antibodies) दवाइयों, या पूर्ववर्ती किरणों द्वारा क्षति,  इत्यादि।

थायराईड हार्मोन की अल्पता का उपचार

 

थायराईड हार्मोन की अल्पता का कारण जो भी हो (अधिक आवश्यकता या कम उत्पादन), उसकी पूर्ती को सुनिश्चित करने के लिए मस्तिष्कतल में उपस्थित अग्रवर्ती पीयूष ग्रंथी (Anterior Pituitary) थायराईड ग्रंथी की क्रियाशीलता उत्तेजित करने वाला हार्मोन टी.एस.एच (Sr. TSH) अधिक मात्रा में उत्पन्न करती है। सामान्यतः टी.एस.एच. की मात्रा रक्त में लगभग 2..5 आई.यू/लीटर होनी चाहिए।

अल्पता का इलाज एक ही है- सक्रीय थायराईड हार्मोन लिवो थायराक्सीन-टी 3 (Levothyroxin or T3) के घटक की पूर्ती। दवाई की मात्रा गर्भकाल व रक्त में टी.एस.एच की मात्रा पर निर्भर करती है।

अधिकांशतः प्रसव पश्चात् आवश्यकता कम होने से दवाई में भी कमी आ जाती है।

अनजाने ही कई बार मरीज इस उधेड़बुन में की जीवनपर्यन्त दवाई का सेवन करना पड़ेगा, थायराईड की दवाई प्रारंभ करने से बच अपने व शिशु के स्वास्थ से खिलवाड़ कर बैठते हैं।

 

थायराईड हार्मोन की अधिकता (Hyperthyroidism):-

लगभग 0.5 प्रतिशत गर्भवति माँ थॉयराईड हार्मोन की अधिकता से ग्रसित होती हैं। इस अवस्था में अतिक्रीयाशील थॉयराईड ग्रंथी शरीर में आवश्यकता से अधिक हार्मोन का उत्सर्जन करती है।

थायराईड हार्मोन की अधिकता के लक्षण –

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इसके कुछ लक्षण जैसे वजन कम होना, कमजोरी व घबराहट लगना, हाथ कांपना, अत्याधिक मतली आना, अप्रत्याशित पसीना आना, गर्म और नम हथेलियाँ, खुद की धड़कन महसूस होना व हृदय गति में तेजी, आंतों की गड़बड़ी व सोने में तकलीफ आदी होते हैं। कई रोगियों में आंखें अप्रत्याशित उभार के कारण डरावनी भी प्रतीत होती हैं।

गर्भावस्था में थॉयराईड हार्मोन की अधिकता के कारण गर्भपात, शिशु के शारिरिक विकास में कमी, समय पूर्व प्रसव, गर्भ में शिशु की आकस्मिक मृत्यु, शर्करा, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, आँवल अवखंडन (Abruptio Placenta) या प्रसवोपरांत अत्याधिक रक्तस्त्राव की संभावना बढ़ जाती है। थॉयराईड क्रायसिस (Thyroid Storm/Crisis) नामक अवस्था गर्भवति माँ एवं शिशु दोनों के लिए ही प्राणघातक सिद्ध हो सकती है।

थायराईड हार्मोन की अधिकता के कारक

थॉयराईड ग्रंथी की अतिक्रियाशीलता के मुख्य कारण उत्तेजक प्रतिरोधक तत्व (Stimulating Autoimmune Antibodies), थायराईड ग्रंथी की सूजन या संक्रमण, उत्तेजक दवाईयाँ, जुड़वा बच्चे या गर्भावस्था संबंधित विकार जिनमें अधिक हार्मोन पैदा होता है, जैसे हायडाटिडिफार्म मोल (Hydatidiform Mole) (गर्भावस्था जिसमें भ्रूण अंगूरनुमा माँस के रूप में विकसित होता है।) इत्यादि  होते हैं।

थायराईड हार्मोन की अधिकता का उपचार

गर्भावस्था में थायराईड हार्मोन की अधिकता को नियंत्रित करने के लिए मुख्यतः तीन दवाइयाँ प्रोपिल-थायोयूरासिल (Propylthiouracil), कार्बिमाजोल (Carbimazole) एवं मेथिमाजोल (Methimazole) ही उपलब्ध हैं। ये दवाईयाँ टायरोसिन (Tyrosine) नामक प्रोटिन तत्व के आयोडिन नामक लवण से मिश्रण (Iodinisation) को रोक कर थॉयराईड हार्मोन के निर्माण प्रक्रिया को अवरूद्ध करती हैं। चूंकि, ये निमार्ण को रोकती हैं ना कि पूर्व निर्मित हार्मोन के निस्तारण को, अत: उनका प्रभाव देरी से आता है।

हांलाकि, इन तीनों ही दवाईयों से चर्म रोग, खुजली, गमोरिया, मतली, बुखार व कदाचित हड्डी मज्जा पर दुष्प्रभाव के कारण रक्त कणों की कमी (Agranulocytosis) या प्रथम तिमाही में सेवन से शिशु में विकृति (Teratogenecity) की भी संभवना होती है। अनुसंधान फलस्वरूप, तुलनात्मक रूप से इन तीनों दवाईयों में प्रोपिल-थायोयूरासिल ज्यादा सुरक्षित प्रतीत होती है।

 

विश्व स्वास्थ्य संघटन एवं सभी वैश्विक संस्थाओं के निर्देषानुसार प्रत्येक गर्भवति महिला की गर्भाधान उपरांत प्रथम तिमाही में ही रक्त में थॉयराईड उत्तेजक हार्मोन (Sr. TSH) की जांच होनी चाहिए ताकि आवश्यकतानुसार उचित उपचार से माँ एवं शिशु की कुशलता सुनिश्चित की जा सके।

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सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



Thyroid Disorders in Pregnancy

The optimum production and circulation of thyroid hormones is very crucial for the normal growth and development of the fetus and mother’s wellbeing as it regulates the cellular metabolism.

To ensure the adequate supply of these hormones, the size, blood supply and function of thyroid gland increases under the influence of Estrogen and Human Chorionic Gonadotropin hormones.

In the first trimester, the fetus is entirely dependent for all its hormonal requirements on mother. After 14 weeks onwards, it sufficiently produces its own hormones. However, it still depends on mother for the supply of raw materials like Iodine and Proteins.

Normal values of Thyroid Stimulating hormone (TSH) in Pregnancy:

Anterior Pituitary hormone produces Thyroid stimulating hormone that regulates the function of thyroid gland and subsequently the production of thyroid hormones.

The decreased functioning of thyroid gland or increased demand of hormone results in positive feedback to anterior pituitary resulting in high levels of Serum TSH, whereas, the hyperfunctioning of thyroid gland and high levels of thyroid gland gives negative feedback and suppress TSH levels.

 

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Hypothyroidism in Pregnancy:

It affects around 5-10% of mothers in pregnancy.

It happens either because of the increased metabolic demand of pregnancy or because of the dysfunction of thyroid gland. Whatever the reason of hypothyroidism, the anterior pituitary gland produces more Thyroid Stimulating Hormone (TSH) to stimulate the thyroid gland to produce more hormones. Hence, in hypothyroidism, the level of TSH rises above normal values (0.3 – 3 IU/L) to maintain euthyroidism.

Symptoms of Hypothyroidism in Pregnancy:

The common symptoms of hypothyroidism in Pregnancy are central obesity, history of irregular menstrual cycle preconception, difficulty in conception, depression, anxiety, mood swings, hair fall, dry skin, swelling in lower limbs, high blood pressure, diabetes, high cholesterol levels etc.

 

 

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Side effects of Hypothyroidism on Mother:

  • Miscarriage.
  • Preterm labor.
  • Pregnancy induced hypertension.
  • Gestational diabetes.
  • Recurrent vulvo-vaginitis.
  • Post delivery hemorrhage.
  • Maternal anemia.

Side effects of Hypothyroidism on Baby:

 

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Causes of Hypothyroidism:

  • Deficiency of raw material like Iodine or Protein synthesis.
  • Dysfunction of thyroid gland.
  • Thyroid gland destruction by autoimmume antibodies.
  • Previous radiation injury to thyroid gland.
  • Exposure to harmful substances, drugs or viral infections that damage thyroid gland.

Management of Hypothyroidism:

The treatment of hypothyroidism, irrespective of reason, is to replace the active thyroid hormone (Levothyroxin or T3) to target the normal TSH values in blood between 0.3 to 3 IU/L.

The dose of levothyroxine may fluctuate during pregnancy and post delivery.

 

 

Due to misconception that they may become dependent on medicine life long, many mothers avoid taking medicine and unknowingly complicate the pregnancy and harm the baby.

 

Hyperthyroidism in Pregnancy:

It affects around 0.5 % pregnant mothers.

The hyperactive thyoid glands produces excess thyroid hormones leading to abnormal high levels of free T3 and free T4 hormones subsequently resulting in lower production of Thyroid Stimulating Hormone due to negative feedback by anterior pituitary and its lower level in blood .

Symptoms of Hyperthyroidism in Pregnancy:hyperthyroidism-in-pregnancy_0

The common symptoms of hyperthyroidism are weight loss, malaise, weakness, anxiety, palpitations, breathlessness, tremors, excessive vomiting, excessive sweating, warm extremities, irritable bowel, insomnia etc. Some mothers may have protruding scary eyes.

Side effects of Hypothyroidism on Mother:

  • Miscarriage.
  • Preterm labor.
  • Pregnancy induced hypertension.
  • Gestational diabetes.
  • Post delivery hemorrhage.
  • Maternal anemia.
  • Congestive heart failure.
  • Separation of placenta from its bed.
  • Thyroid storm or crisis, which is a life threatening condition.

Side effects of Hypothyroidism on Fetus:

  • Intrauterine growth retardation.
  • Intrauterine fetal death.
  • Prematurity.

Causes of Hyperthyroidism:

  • Stimulating Autoimmune Antibodies.
  • Inflammation or infection of thyroid glands.
  • Drugs and substances that stimulate thyroid function.
  • Multifetal pregnancy.
  • Placental overproduction of HCG hormone.
  • Molar pregnancy, where the baby degenerates into a mass of grape like structure.

Management of Hyperthyroidism:

The treatment of hyperthyroidism, irrespective of reason, is to suppress the thyroid hormone production with the help of medicines to target the normal TSH values in blood between 0.3 to 3 IU/L.

The three medicines that are often used are Propylthiouracil, Carbimazole and Methimazole. These three interrupts the process of Iodinisation of Tyrosine protein and control thyroid hormone production. These medicine are notorious to cause teratogenecity when used in first trimester and hence needs proper counseling and informed consent. They can also adversely affect the mother causing skin problems, itching, vomiting, fever and bone marrow suppression leading to anemia and agranulocytosis.

According to certains studies, the preferred medicine with least side effects is Propylthiouracil.

According to World Health Organisation and other International organisations, all the pregnant mothers should be offered universal screening with Serum TSH to access the thyroid function to ensure the safety of mother and fetus.

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Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.