गर्भावस्था में नियमित परीक्षण आवश्यक क्यों ? (Why regular Antenatal Care is Important?)

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“किसी भी सभ्यता व संस्कृति की पहचान इस तथ्य से होती है, कि, वे अपने सबसे कमजोर सदस्यों की सुरक्षा व सेवा कैसे करते हैं ?”

संपूर्ण विश्व में प्रत्येक देश व उनकी सरकारों का विशेष प्रयास होता है, गर्भवती माँ व 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की देखरेख। ये शारिरिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से समाज का सबसे नाजुक वर्ग है, जिसे विशिष्ट देखभाल देना सभी का कर्तव्य है। बच्चे समाज का भविष्य होते हैं, और स्वस्थ माँ ना केवल स्वस्थ बच्चे को जन्म देगी। गर्भावस्था के दौरान हुई बीमारियां या संक्रमण भ्रूण को ग्रसित कर सकते हैं। वर्तमान अनुसंधान से ज्ञात है, कि, प्रौढ़ावस्था में होने वाले विभिन्न रोग जैसे शर्करा, उच्च रक्त चाप व हृदयरोग का एक मुख्य कारण गर्भ में प्राप्त वातावरण भी होता है। अतः माँ व शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, गर्भधारण व प्रसव की उचित देखभाल अतिआवश्यक है। यही वह समय है, जब वे अपनी स्वयं की समोचित देखभाल के लिए अक्षम होने से दूसरों पर आधारित होते हैं।

कुछेक प्रभुद्धजन अकसर शिकायत करते हैं कि, वर्तमान व्यवसायिकरण व नैतिक पतन के कारण नियमित परिक्षण, जांचे व दवाईयां चिकित्सकों की अनावश्यक चोचलेबाजी है। पूर्व में तो दाईयाँ घरों में ही प्रसव करा देती थी किंतु वर्तमान में तो अस्पतालों को कमाई का अड्डा बना लिया है। फिर अनेकानेक बार मीडिया या कुछ विख्यात कलाकार या जननेता द्वारा सस्ती प्रसिद्धि के लिए बिना पड़ताल किए दुष्प्रचार करने से अविश्वास एक आम अवधारणा बनती जा रही है।

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वास्तविकता है कि वर्तमान समय में चिकित्सा क्षेत्र ही नहीं, किंतु दैनिक जीवन में भी प्रत्येक क्षेत्र में हमारे नैतिक मूल्यों में पतन चिंताजनक स्तर पर है। किंतु एक तराजु में सभी को तोलना अनुचित होगा।

पूर्व में अधिकांश माँ लगभग दर्जन भर बच्चों को जन्म देती थी किंतु औसतन उनमें से कम अनुपात में ही शिशु जीवन काल पूर्ण कर पाते थे। अधिकांशतः शिशु गर्भ, प्रसवोपरांत या बाल्यावस्था में मृत्यु प्राप्त कर लेते थे। केवल योग्यतम व सर्वशक्तिमान शिशु ही संपूर्ण जीवनकाल जी पाते थे। अनुसंधान के अभाव में हम कई बार आकस्मिक मृत्यु का उचित कारण भी नहीं ज्ञात कर पाते थे। अब जब हमें यह ज्ञात है कि नियमित समोचित देखभाल से हम माँ व शिशु दोनों को संरक्षित रख सकते हैं, तो यह चोचलेबाजी कैसी ?

गर्भवास्था संबंधित समस्याओं व कुटिलताओं का हमारे ग्रंथों में भी उल्लेख है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गर्भावस्था में माँ व शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संभवतः प्रथम 7 माह में प्रत्येक माह, आठवे माह में प्रति 15 दिवस व नौवे माह में प्रत्येक सप्ताह नियमित परिक्षण आवश्यक है।

प्रथम मुलाकात में चिकित्सक द्वारा माँ व परिवार की विस्तृत जानकारियाँ जो किसी भी रूप में गर्भावस्था या माँ व शिशु के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, एकत्र की जाती है। सविस्तार भौतिक परिक्षण जैसे लंबाई, वजन, हृदयगति, रक्तचाप, विभिन्न तंत्रो के परिक्षण इत्यादि किया जाता है। कुछ साधारण रक्त, पेशाब व यौन रोग की जांच आवश्यक होती है। इस वक्त हमें चिकित्सक से गर्भावस्था में होने वाले परिवर्तनों, दैनिक कार्यो के विभिन्न पहलुओं जैसे भोजन, व्यायाम, कामक्रीड़ा इत्यादि, पालन करने योग्य सावधानियों, व संभावित खतरों से अवगत करने योग्य परिचर्चा करनी चाहिए।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 


Why regular Antenatal Care is Important?

“The test of any civilization and culture is based on the amount of protection and care that it provides to its most vulnerable members.”

All the Governments worldwide are commited to provide special care to the pregnant mothers and children below 5 years to reduce the maternal and infant mortality. They are physically, mentally and emotionally the most fragile sections of the society that needs special care and are completely dependent on others. Hence, it is the moral responsibility of the society to give them the due care.

Children are the future of society, and the healthy mother would give birth to healthy child. The diseases and infections during the pregnancy can adversely affect both the mother and the fetus. In fact, current researches prove beyond doubt that the onset of adult diseases such as diabetes, high blood pressure and heart disease have their roots in the intra-uterine environment. Therefore, to ensure the safety of both mother and child, it is important to give ideal care to the pregnant mothers and their newborn.

Some socialists beliefs that the regular antenatal care, basic investigations and medicines that are recommended worldwide are unnecessary propaganda of the specialists doctors and pharmaceuticals to earn money. The Dais (Traditional birth attendants) would deliver the mother at home with minumun resources, but, nursing homes have become den of earnings. To, make it worse, some media personnel and celebrities for cheap fame adds fuel to fire, without evaluating the facts and figures.

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The reality is that there is a significant deterioration in the moral values of the socity at all levels. but, it would be unfair to assess everyone on same parameters.

In past, most of the mothers would deliver a dozen of children, but only a few of them would survive the infancy. As the hypothesis suggests, ” Survival of the fittest”, only the children with good genetic potential, proper antenatal and postnatal care would live a normal life. In the past we could not identify the reason for fetal or neonatal deaths, but, with due credits to the modern medicine, we know that most of the deaths are preventable by good antenatal and postnatal care of mother and newborn. In fact, our ancient literature also signifies the same.

So, Antenatal care of mother and Newborn care is must and is not plotted.

According to the World Health Organization, to ensure the safety of pregnant mother and newborn, it mandatory to have once a month regular antenatal check up for first 7 months, biweekly in 8th month and once a week in 9th month.

The first visit after conception is the most important interaction between the expectant mother and the physician. All the present and past medical, obstetric, menstrual and anyother significant history of the patient is noted in detail. Detailed physical examination including height, weight, heart rate, blood pressure, etc. are evaluated. Basic investigations including blood, urine and sexual dysfunction are recommended. It is important to counsel the mother regarding the expected normal physiological changes in her, and enlighten her regarding do’s and don’ts of pregnancy. She should also be told about the danger signs of pregnancy.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.