नवजात शिशु में पीलिया / Neonatal Jaundice

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शरीर के अंगों जैसे आँखें, चमड़ी इत्यादि का रोगवश पीले रंग में रंगने को पीलिया कहते हैं। लगभग 60 प्रतिशत नवजात जन्म के प्रथम सप्ताह में पीलिया से ग्रसित होते है। यह रक्त में बिलिरूबिन नामक पीले रसायन की अधिकता के कारण होता है। इसका उत्पादन लाल रक्त कोशिकाओं के भंग होने से मुक्त हीमोग्लोबिन के क्षरण द्वारा होता है। प्रायः लीवर इस तत्व का परित्याग अपने स्त्राव के माध्यम से मल में करता है।

जहाँ व्यस्कों में रक्त में बिलिरूबिन की मात्रा 2 मि.ग्रा. से अधिक होने पर पीलिया प्रतीत होता है, नवजात में इसकी मात्रा 5 मि.ग्रा. से अधिक होने पर होता है।

नवजात में पीलिया रोग के क्या कारण होता है?

नवजात में पीलिया रोग के मुख्यतः दो कारण होते है-

  • शिशु के फीटल हीमोग्लोबिन का व्यस्क हीमोग्लोबिन से प्रतिस्थाप्ना।
  • नवजात शिशु का अपेक्षाकृत अपिरपक्व लिवर अघुलनशील बिलिरूबिन को घुलनशील तत्व में परिवर्तन करने में अक्षम होता है और उसकी मात्रा रक्त में बढ़ती जाती है।

हालांकि, कुछ शिशुओं में गंभीर विकार के कारण भी पीलिया हो जाता है।

स्तनपान आधारित पीलिया क्या होता है?

लगभग एक तिहाई शिशु अपने द्वितीय सप्ताह में इससे ग्रसित होते हैं। इसका मुख्य कारण –

  • आँतों में सामान्यतः उपस्थित जीवाणुओं के विकास के अभाव में आँतों से निष्कासित बिलिरूबिन को पुनः अवशोषण के कारण रक्त में अधिकता।
  • कुछ माताओं के दूध में उपस्थित विशिष्ट तत्व जो घुलनशील बिलिरूबिन की निर्माण प्रक्रिया में अवरोध पैदा करते है।

किन विकारों के कारण गंभीर पीलिया हो सकता है?

1- बिलिरूबिन का अत्याधिक निर्माण-

  • लाल रक्त कोशिकाओं के वे विकार जिनमें उनका तीव्र क्षरण होता है जैसे, माता-पिता में ब्लड ग्रुप की असंगति, थैलेसेमिया एवं सिकल सेल डिसीज़ जैसे हीमोग्लोबिन निर्माण के विकार, आवश्यक एन्जाईम की अल्पता इत्यादि।
  • वे रोग जिनमें लाल रक्त कोशिकाओं का बाहरी क्षति के परिणामस्वरूप क्षरण होता है। जैसे लिवर और तिल्ली की सूजन, रक्त धमनियों में विकृती इत्यादि।

2- लिवर द्वारा घुलनशील बिलिरूबिन की निर्माण प्रक्रिया में अवरोध-

  • लिवर की सूजन।
  • निर्माण प्रक्रिया में आवश्यक एन्जाईम की अल्पता।

3- बिलिरूबिन युक्त स्त्राव को लिवर से आँतों तक ले जाने वाले मार्ग की विकास की कमी या विकृत विकास के परिणामस्वरुप रुकावट।

4- अन्य कारण जैसे गंभीर संक्रमण, थायराईड हार्मोन की अल्पता, प्रसव के दौरान शिशु को क्षति के कारण रक्त का सिर में जमना, लिवर के लिए नुकसानदायक दवाईयाँ इत्यादि।

नवजात शिशु में पीलिया का निदान कैसे किया जाता है?

  • परिक्षण – आँखों एवं चमड़ी में पीलेपन के आधार पर पीलिया की श्रेणी निर्धारित करना।
  • मशीन की सहायता से रक्त में बिलिरूबिन की मात्रा मापना।

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किन नवजात शिशुओं में पीलिया होने की संभावना अधिक होती है?

  • समयपूर्व प्रसव से जन्में शिशु।
  • आयु से लघुतर कम वजन के शिशु।
  • गर्भ में संक्रमण।
  • प्रसव के दौरान शिशु को क्षति लगने से रक्त का जमाव।
  • जुड़वा में से वह शिशु जिसे अतिरिक्त रक्त प्राप्त हुआ।

नवजात शिशुओं में पीलिया के दुष्प्रभाव?

  • अत्याधिक सुस्ती।
  • दुग्धपान ना करना।
  • निरंतर तीव्रता से रोना।
  • मस्तिष्क में स्थाई विकार (Kernicterus) जिसमें शिशु को बुखार एवं झटके आते हैं।

नवजात शिशुओं में पीलिया का उपचार?

 

  • अधिकांश शिशुओं में निम्नतर पीलिया होने की अवस्था में मात्र प्रातः की कौली धूप लाभकारी होती है। आँखों की सुरक्षा के लिए उन्हें ढकना चाहिए। दुग्धपान भी पीलिया कम करने में सहायक होता है।
  • फोटो थैरेपी – पीलिया की मात्रा 15 मि.ग्रा. से अधिक बढ़ने पर नीली रंग की तरंगों की सहायता से फोटो थैरेपी दी जाती है, जिससे घुलनशील बिलिरूबिन का निर्माण हो, पीलिया में कमी आती है। आयु से लघुतर या कम वजन के शिशुओं में कम स्तर होने पर भी इसे देना आवश्यक होता है।

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  • पीलिया की मात्रा 20 मि.ग्रा. से अधिक बढ़ने पर शिशु को बचाने के लिए रक्त की अदला-बदली भी करनी पड़ सकती हैं।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 

 



Neonatal jaundice affects around 60% of all babies in first week of life. Neonatal jaundice or icterus is a yellowish discoloration of newborn’s skin, eyes and other tissues. It is caused by excess bilirubin in baby’s blood.  Bilirubin is a yellow-colored pigment formed from the chemical degradation of hemoglobin released from degeneration of red blood cells. Normally, the liver filters bilirubin from the bloodstream and releases it into the intestinal tract.

In neonates, the bilirubin level of more than 85 μmol/l (5 mg/dL) leads to jaundice as against a level of 34 μmol/l (2 mg/dL) in adults.

What is the cause of neonatal jaundice?

In neonates, the physiological jaundice tends to develop because of two factors –

  1. The breakdown of fetal hemoglobin as it is replaced with adult hemoglobin.
  2. The relatively immature liver is unable to convert fat-soluble bilirubin to its easily excretable water-soluble form by the process of conjugation.

However, in some cases, an underlying disease may cause jaundice and hence it is called as Pathological jaundice.

What is breast milk jaundice?

Breast milk jaundice occurs later in the newborn period with peak between 6th to 14th days of life. It develop in up to one third of healthy breastfed infants. It may be because of –

  1. Lack of normal bacterial flora in neonatal gut leads to increased reabsorption of excreted bilirubin leading to its increased levels in blood.
  2. Breast milk of some mothers contain those enzymes that interfere with process of conjugation.

What diseases can cause pathological jaundice?

The pathological diseases causing jaundice are broadly categorized as-

1- Increased production of bilirubin:

  • Those abnormalities of baby’s red blood cells that causes them to break (hemolysis) like Blood group incompatibility, Hemoglobin disorders like Thalassemia and Sickle cell disease, abnormally shaped RBCs, enzyme deficiencies etc.
  • Those diseases that cause RBC break down due to external damage like liver and spleen diseases, arterio-venous malformations etc.

2- Decreased conjugation by liver:

  • Liver diseases causing dysfunction like hepatitis.
  • Deficiencies of enzymes required for conjugation.

3- Obstruction to the biliary tract hindering excretion of bilirubin into Gastro-intestinal tract like biliary atresia (nondevelopment) or choledochal cyst (abnormal development).

4- Other causes like, Severe infections leading to sepsis, Collection of blood due to trauma during delivery like cephaltoma, Drugs causing damage to liver etc.

How is jaundice detected in neonates?

It is detected by

  1. Clinical Examination : Yellowish discoloration of the sclera (white part of the eye), Blanching the Skin of face or extremities by applying pressure with finger to assess underlying subcutaneous tissue.The discoloration extends from face to extremities as the bilirubin level rises.
  2. Evaluation of bilirubin in blood by laboratory or automated Transcutaneous bilirubinometer

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Which newborn are at risk of developing exaggerated neonatal jaundice?

  • Preterm babies born before 37 completed weeks of gestation.
  • Intrauterine growth retardation.
  • Intrauterine infections.
  • Cephaltoma – Collection of blood in scalp due to birth trauma.
  • The twin which received extra blood and became polycythemic.

What are the side effects of Neonatal Jaundice?

Prolonged and uncontrolled neonatal jaundice is serious and should be followed up promptly.

  • Lethargy and decreased activity.
  • Interference with feeding.
  • High pitch cry.
  • Kernicterus – brain damage (encephalopathy) due to uncontrolled high levels of bilirubin in blood characterized by fever and convulsions.

How is neonatal jaundice managed?

  • Majority of babies do not need any active management except exposure to mild early morning sunlight with eyes covered and close observation. Increased feedings help move bilirubin through the neonate’s intestinal tract.
  • When the level of bilirubin is more than 15 mg%, the photo therapy is recommended. However in high risk cases, it may be offered at lower values.

Blue light of wavelength of 420-480 nm (peak 458 nm), caused transformation of the trans bilirubin to cis bilirubin, a soluble product that do not lead to brain damage by the process of photo-isomerisation.

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The light can be applied with overhead lamps, which means that the baby’s eyes need to be covered, or with a device called a Biliblanket, which sits under the baby’s clothing close to its skin.

  • Exchange Blood transfurion is recommended at levels above 25 mg% to safeguard the baby.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.