placenta-previa

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गर्भावस्था के दौरान लगभग 5 से 10 प्रतिशत माताएं कभी ना कभी रक्तस्त्राव का अनुभव करती हैं। परिणामस्वरुप गर्भपात की आशंका के कारण गर्भवती माता और पूरा परिवार मानसिक और भावनात्मकरुप से चिंतित और भयभीत हो सकते हैं।

प्रथम तिमाही के दौरान रक्तस्त्राव का मूल कारण अधिकांशतः आँवल निर्माण की प्रक्रिया के दौरान शिशु के ट्रोफोब्लास्ट ऊतकों द्वारा माता की गर्भाशयीय रक्तधमनी में अतिक्रमण के कारण होता है।  किंतु द्वितीय तिमाही पश्चात् इसका मूल कारण पुरःस्था अपरा नामक विकृति हो सकती है।

placenta invasion

सामान्यतः आंवल गर्भाशय के ऊपरी खण्ड में स्थित होती है। किंतु लगभग 200 में से एक गर्भवती महिलाओं में यह गर्भाशय के निम्न खण्ड में स्थित होती है।

गर्भाशय के अधोखण्ड (Lower Uterine Segment) में आंशिक रूप से स्थित अपरा को  अधोस्थित अपरा (Low lying Placenta) एवं पूर्णरूप से स्थित अपरा को  पुरःस्था या सन्मुखी अपरा (Placenta Previa) कहते हैं।

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अधोखण्ड में असमान्य प्रत्यारोपित (Abnormal placenta implantation) होने के कारण अपरा का अपने मूलाधार से पृथक (Placental separation) होने की संभावना बढ़ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप प्रसवपूर्व रक्तस्त्राव (Antepartum hemorrhage) हो सकता है।

हालांकि, गर्भकाल की प्रगति के साथ ही अधोखण्ड के विकास से अपरा अनेक महिलाओं में अपने सामान्य स्थान को प्राप्त कर लेती है, इसे अपरा का पलायन (Migration of Placenta) कहते हैं ।

पुरःस्था अपरा के कारक-

इस अवस्था के संपूर्ण कारण अभी ज्ञात नहीं। हालांकि निम्न स्थितियों में इसकी संभावना अधिक होती है।

  • गर्भित डिम्ब का अधोखण्ड में प्रत्यारोपण। (Implantation of embryo in Lower uterine segment)
  • 35 वर्ष से अधिक आयु में गर्भधान।(Elderly pregnancy)
  • बहु प्रसव (3 से अधिक प्रसव) (Multipara)
  • अपरा का विशालाकार होना – बहुगर्भा (जुड़वा या अधिक), संक्रमण, रीसस फैक्टर या अन्य रक्त विसंगति के कारण अपरा में सूजन इत्यादि। (Large size placenta due to multiple gestation, infections, Rhesus or ABO incompatibility etc.)
  • संक्रमण या पूर्व की किसी भी प्रकार की शल्यक्रिया के परिणामस्वरुप गर्भाशय की श्लेष्मकला का पतन या गर्भाशयान्तर बन्ध। (Endometrial fibrosis or adhesions due to previous infections, PID or surgery)
  • एडिनोमॉयोसिस के कारण गर्भाशय की सूजन। (Adenomyosis or Bulky uterus)
  • श्लेष्मकलातल में स्थित रसौली की गठान। (Submucous fibroid)
  • सीज़ेरियन द्वारा पूर्व में प्रसव का सम्पादित होना। (Previous LSCS)
  • अपरा विकार। (Placenta malformation)
  • पूर्व गर्भावस्था में पुरःस्था अपरा होने पर पुनरावृत्ति की संभावना होती है। (Recurrence due to previous history of Placenta Previa)

पुरःस्था अपरा का वर्गीकरण-

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अधोखणड में अपरा के प्रत्यारोपण के स्थानानुसार इसे चार श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है।

  • प्रथम श्रेणी – इसमें अपरा मुख्यतः गर्भाशय के ऊर्ध्वखण्ड (Upper uterine segment or fundal cavity) में ही स्थित होती है। केवल नीचे का कुछ अंश गर्भाशय के अधोखण्ड में गर्भाशयग्रीवा के अन्तर्मुख के 5 सेंटी मीटर के भीतर समीप तक पहुँचता है, किंतु उसे छूता नहीं।
  • द्वितीय श्रेणी – इसमें अपरा गर्भाशयग्रीवा के अन्तर्मुख के एक किनारे तक पहुँच उसे स्पर्श करती है।
  • तृतीय श्रेणी – इसमें अपरा अविस्फारित गर्भाशयमुख (Undilated cervix) को पूर्णतः, परंतु विस्फारित (Full dilatation) होने पर आंशिक रूप में आवृत करती है।
  • चतुर्थ श्रेणी – इसमें अपरा पूर्ण विस्फारित गर्भाशयमुख को भी आच्छादित करती है।

पुरःस्था अपरा में रक्तस्त्राव की प्रक्रिया-

गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में अपरा की वृद्धि बहुत कम होती है, किंतु शिशु के विकास के साथ ही गर्भाशय का अधोखण्ड निरंतर बढ़ता है।

ऐसे में अप्रत्यास्थ (Inelastic) अपरा गर्भाशय के अधोखण्ड से पृथक होने पर रक्तधमनियों के विदरित हो जाने के कारण प्रसवपूर्व रक्तस्त्राव प्रारंभ हो सकता है। अभिघात, संभोगक्रिया, योनिपरिक्षा से अपरा का पृथकीकरण प्रभावित हो सकता है।

अधोखण्ड की माँसपेशियाँ तुलनात्मक रूप से कम घनत्व एवं उनमें कम संकुचन शक्ति होने के कारण वे अपने में समाहित रक्त वाहिनियों पर उचित दाब नहीं बना पाती, अतः प्रसवक्रिया व सूतिकाकाल में अत्याधिक रक्तस्त्राव हो सकता है।

पुरःस्था अपरा के लक्षण एवं चिन्हः

लक्षण– आकस्मिक रूप से, वेदनारहित, प्रत्यक्षतया अकारण, बिना संकुचन के बारंबार रक्तस्त्राव ही मुख्य लक्षण है। यह कभी-कभी स्त्री को नींद या विश्राम में भी अचानक प्रारंभ हो सकता है।

चिन्ह– रक्तस्त्राव के अनुपात में शारिरिक कमजोरी, नाड़ीगति, रक्तचाप, रक्ताल्पता इत्यादि।

परिक्षण एवं निदान-

  • उदर परिक्षण में गर्भकाल के समकक्ष विकसित गर्भाशय सामान्य शिथिल एवं मृदु अवस्था में रहता है। शिशु की कुशलता के आधार पर हृदय ध्वनि सुनी जा सकती है।
  • योनी परिक्षण रक्तस्त्राव बढ़ा सकता है, अतः यह वर्जित है।
  • अवखण्डित अपरा भी गर्भावस्था में आकस्मिक रक्त स्त्राव का कारण हो सकती है।
  • परिक्षण व निदान के लिए सोनोग्राफी सर्वश्रेष्ठ विधी है।

पुरःस्था के कारण उपद्रव-

गर्भवति महिला मेः

  • रक्ताल्पता।
  • गर्भावस्था में अति रक्तस्त्राव के कारण आघात की संभावना।
  • सीज़ेरियन प्रसव की अधिक संभावना।
  • प्रसव के दौरान अत्याधिक रक्त स्त्राव का भय।
  • प्रसव के दौरान सिरावरोध का खतरा।
  • सूतिका काल में गर्भाशय का अल्प अन्तर्वलयन।

शिशु मेः

  • अधिकांशतः विकृत प्रस्तुति, अनुप्रस्थ आसन या अस्थिर आसन।
  • समय पूर्व प्रसव के कारण शिशु का अल्प भार या लघुतर होना।
  • शिशु को श्वास लेने में असुविधा।
  • रक्ताल्पता।

उपचार-

रक्तस्त्राव की गंभीरता, महिला एवं भ्रूण के स्वास्थ, गर्भकाल की अवधी और प्रसवपीड़ा के आधार पर चिकित्सा को दो भागों में बांटा जाता है।

प्रतीक्षी चिकित्सा

सक्रीय चिकित्सा

अल्प मात्रा में रक्तस्त्राव प्राणघातक अत्याधिक रक्तस्त्राव
गर्भकाल की अवधी 38 सप्ताह से कम गर्भकाल की अवधी 38 सप्ताह से अधिक
सामान्य स्थिर स्वास्थ्य आघात
हीमोग्लोबिन 10 ग्राम प्रतिशत से अधिक अत्याधिक रक्ताल्पता
प्रसव प्रारंभ नहीं प्रसव प्रारंभ
भ्रूण की हृदयगति सामान्य भ्रूण की हृदयगति अनुपस्थित या गर्भ में ही मृत्यु।
सामान्य गर्भ विकृत गर्भ

 

प्रसव-

  • प्रथम श्रेणी एवं द्वितीय श्रेणी में सामने की ओर स्थित अपरा की अवस्था में योनी मार्ग द्वारा प्रसव संपादन का प्रयास किया जा सकता है।
  • द्वितीय श्रेणी में पीछे की ओर स्थित अपरा की अवस्था में चूंकि शिशु के मस्तक और रीढ़ की हड्डी के मध्य अपरा पर दबाव पड़ने से शिशु को रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है अतः सीज़ेरियन शल्य क्रिया के माध्यम से ही प्रसव संपादित किया जाना चाहिए।
  • तृतीय व चतुर्थ श्रेणी में अपरा का प्रसवकाल में पृथक होने से अत्याधिक रक्तस्त्राव के कारण माता व शिशु को जान का खतरा होता है, अतः सीज़ेरियन शल्य क्रिया के माध्यम से ही प्रसव संपादित किया जाता है।

पुरःस्था से ग्रसित महिलाओं के लिए ध्यान देने योग्य कुछ बातें-

  • ऐसा कोई भी कार्य जिसमें गिरने या पेट पर चोट लगने का भय हो ना करें।
  • भारी वजन ना उठायें।
  • संभोग क्रिया वर्जित है।
  • आगे की ओर ना झुकें।
  • दो पहिया वाहनों या उबड़-खाबड़ मार्ग वाले स्थान पर सफर करने से बचें।
  • रेशेदार सब्जियों, ताज़े फल व भरपूर पानी का सेवन करें, ताकि कब्ज़ ना हो, अन्यथा मलत्याग के दौरान पेट पर जोर पड़ सकता है।
  • बिस्तर पर आराम की सख्त हिदायत केवल सक्रीय रक्तस्त्राव की विषम परिस्थिति में ही दी जाती है। अन्यथा चिकित्सीय सलाह से माँ टहलना व सुरक्षित व्यायाम कर सकती है। किंतु वे व्यायाम जिनमें झटके लगने, पेट पर जोर पड़ने, आगे झुकने या मार लगने का भय हो, वे वर्जित हैं।
  • अंतिम तिमाही में कभी भी प्रसव प्रारंभ हो सकता है या अधोखण्ड के विकास के कारण अपरा के पृथक हो जाने से अत्याधिक रक्तस्त्राव की संभावना हो सकती है। अतः अपने चिकित्सक से चर्चा कर निकटतम रक्तकोष में मिलान किए हुए रक्त की तैयारी रखना चाहिए।
  • आकस्मिक परिस्थिति के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ करके रखनी चाहिए।
  • अपने चिकित्सक, निकटतम प्रसूतिगृह, रक्तकोष, एम्बूलेंस इत्यादि की संपर्क जानकारी ऐसे स्थान पर अंकित रखनी चाहिए कि अपघात अवस्था में परेशान ना होना पड़े।
  • पति की अनुपस्थिति में प्रभारी व्यक्ति का निर्णय।
  • आकस्मिक कोष की व्यवस्था।

पुरःस्था शिरा

vasa previa

यह एक विषम परिस्थिति है जब शिशु की रक्त वाहिनियाँ असुरक्षित रूप से गर्भग्रीवामुख के ऊपर स्थित होती हैं। ये वाहिनियाँ गर्भनाल या अपरा से पृथक होती है। या तो ये अतिरिक्त अपरा से जुड़ी होती हैं, या फिर सामान्य अपरा में असाधारण अंतर्वेष के कारण। अनेक बार ये पुरःस्था अपरा के सहवर्ती होती है।

vasa previa

इनके लक्षण, निदान व उपचार चौथी श्रेणी की पुरःस्था अपरा के समान ही होता है।

चूँकि इन वाहिनियों में शिशु का रक्त प्रवाहित होता है, अतः अत्याधिक रक्तस्त्राव की अवस्था में शिशु की मृत्यु का भय रहता है।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



 

Placenta

Approximately 5 to 10 percent of mothers may occasionally experience bleeding during the pregnancy. Due to the risk of miscarriage, the mother and entire family may be under enormous mental and emotional stress.

In the first trimester, during the placenta formation, it may be due to the invasion of maternal uterine arteries by the fetal trophoblastic tissues. However second trimester onward, it may be mainly due to the abnormal placenta formation known as Placenta Previa.
placenta invasion

Usually placenta is located in the upper segment of the uterus. But, in 1 out of 200 mothers, it may occupy the lower uterine segment covering the internal os partially or completely. Placenta Previa may be a life threatening condition.

placenta previa5

Due to implantation in abnormal location, there is increased risk of placental separation leading to antepartum hemorrhrage.

However in majority of cases, with the development of lower uterine segment the placenta may shift to upper segment away from the internal cervical os. This is called as Migration of Placenta.

Causes of Placenta Previa?

The exact cause of placenta previa is not known. However the risk factors includes,

  • Implantation of embryo in Lower uterine segment.
  • Elderly pregnancy after 35 years of age.
  • Multipara
  • Large size placenta due to multiple gestation, infections, Rhesus or ABO incompatibility etc.
  • Endometrial fibrosis or adhesions due to previous infections, PID or surgery.
  • Adenomyosis or Bulky uterus.
  • Submucous fibroid.
  • Previous LSCS.
  • Placenta malformation.
  • Recurrence due to previous history of Placenta Previa.

Classification of Placenta Previa –

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According to the location of placental implantation it is classified into four categories.

Type I- The placenta mainly occupies the upper uterine segment or fundal cavity. Its lower edge reaches the lower uterine segment within 5 cm from the internal os but do not touch it.

Type II – The lower edge of the placenta reaches and touch the internal os, but do not cover it.

Type III – The placenta completely covers the undilated cervix, but partially covers on dilatation. It is called as Partial placenta previa.

Type IV – The placenta completely covers the cervix even on full dilatation. It is also called as Central Placenta Previa

Cause of bleeding in Placenta Previa?

In the last trimester, there is limited placental growth; however with the development of baby, the lower uterine segment undergoes significant distension.

Due to sheering pressure, placental separation leads to disruption of blood vessels resulting in blood loss. Trauma, sexual intercourse, vaginal digital examination can all lead to placental separation.

The muscles of lower uterine segment are relatively sparse and less stronger, hence they are not able to efficiently compress the passing spiral arteries through them. So, there is increased risk of bleeding during delivery and postpartum.

Signs and Symptoms of Placenta Previa?

Symptoms- Recurrent sudden painless bout of bleeding without any preceding cause is the most common symptom. It can occasionally happen when the mother is even resting.

Signs- Depending on the amount of blood loss, the patient may experience physical weakness, anemia, increased pulse rate, low blood pressure, shock etc.

 Clinical Examination and Diagnosis?

  • On per abdomen examination the uterine fundal height corresponds to the gestational age. The uterus is soft and relaxed. The fetal heart sounds are audible depending on the fetal wellbeing.
  • Vaginal digital examination is contraindicated due to the risk of torrential bleeding because of placental separation.
  • Placental abruption can also leads to antepartum hemorrhage.
  • Ultrasonography is the best mode of investigation and diagnosis,

Complications of Placenta Previa?

Maternal:

  • Anemia
  • Torrential bleeding leading to hypovolumic shock.
  • Increased incidence of Caesarean delivery.
  • Increased Intra partum and Postpartum hemorrhage.
  • Risk of embolism during parturition.
  • Post delivery sub involution of uterus to its normal size.

Fetal

  • Abnormal presentation, transverse or unstable lie of fetus
  • Preterm delivery leading to low birth baby or small for gestational age baby.
  • Breathing difficulty in baby.
  • Fetal anemia.

Management-

Based on the severity of bleeding, maternal and fetal health, duration of gestational age and

Expectant management

Active management

Minimal to moderate bleeding. Heavy and fatal bleeding per vaginum.
Gestational age less than 38 weeks of gestation. Gestational age less than 38 weeks of gestation.
Normally stable health. Hypovolumic shock due to acute blood loss.
Hemoglobin more than 10 gm%. Severe Anemia.
Labor pain do not begin. Onset of labor pains.
Fetal wellbeing. Intrauterine fetal death.
Normal Fetus Abnormal fetus.

Delivery-

  • Type I and those type II placenta previa where placenta is situated anteriorly can be attempted for vaginal delivery.
  • However type II placenta previa where placenta is located posteriorly should be delivered by elective caesarean delivery. As during delivery there is possibility of compression of placenta between fetal head and maternal spine, thereby compromising the fetal blood supply.
  • Type III and Type IV placenta previa are delivered by elective caesarean delivery due to risk of torrential intrapartum and postpartum bleeding because of placental separation and risk to both mother and fetus.

Important points to remember:

  • Avoid any activity that risks fall or trauma to abdomen.
  • Do not lift heavy weight.
  • Avoid sexual intercourse.
  • Do not bend forward. If you have to lift anything from ground, kneel down and then pick.
  • Avoid crowded places.
  • Avoid travel on two wheelers and at uneven surfaces. Avoid jerks.
  • Strict bed rest is only recommended during the episode of active bleeding. Otherwise the mother can do gentle walking and light exercises under the supervision of their doctor.Those exercises that risk fall, bending forward, increasing intra-abdominal pressure or injury to mother or fetus are contraindicated.
  • Eat plenty of fibrous vegetables and fresh fruits and drink plenty of fluids to avoid constipations, as it risks intra-abdominal pressure and placental separation.
  • In last trimester with the development of lower uterine segment or onset of labor, there is always a risk of placental separation and torrential bleeding. Hence discuss with your doctor and always keep atleast two units of blood ready after cross matching in nearby blood bank.
  • Keep everything ready for any untoward emergency.
  • Note down the contact details of your doctor, near by nursing home, blood bank, ambulance etc, at a place easily accessible to avoid any panic situation.
  • Discuss about the caretaker or person responsible in absence of your husband in case of any emergency.
  • Keep emergency funds handy.

 

Vasa Previa-

vasa previa

This is an abnormal condition where the unprotected fetal blood vessels traversing the fetal membranes are located above the internal os. These vessels are not protected by the umbilical cord or placental tissue.

These vessels may be from either a velamentous insertion of the umbilical cord or may be joining an accessory placental lobe to the main disk of the placenta. They often coexist with placenta previa.

vasa previa

The signs and symptoms, mode of diagnosis and management is same as type IV placenta previa.

Since these blood vessels carry fetal blood, the torrential bleeding from them can be fatal to fetus and may lead to intrauterine death.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.