पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पी.सी.ओ.एस.) और गर्भावस्था। PCOS and Pregnancy!

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पी.सी.ओ.एस.) और गर्भावस्था। PCOS and Pregnancy!

pcos

Read in English

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पी.सी.ओ.एस.) आधुनिक जीवन शैली के कारण महिलाओं में एक महामारी के रूप में फैलती जा रही है। वर्तमान समय में लगभग 10 से 20 प्रतिशत महिलायें अपनी प्रजननशील आयु (18 से 44 वर्ष ) में इससे ग्रसित हैं और जिस कारण यह उनमें मासिक अनियमितता, मोटापे और निःसंतानता का मुख्य कारण है। इसके कारण गर्भावस्था पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

पी.सी.ओ.एस. का क्या कारण है?

पी.सी.ओ.एस. का यथार्थ कारण अभी ज्ञात नहीं है, किंतु यह माना जाता है कि यह अनुवांशिक एवं जीवनशैली संबंधित कारणों के सामुहिक प्रभाव से होता है। इसका मूल विकार इंसुलिन नामक अंतःस्त्राव (हार्मोन) के प्रति कोशिकाओं में प्रतिरोध के कारण होता है। जिसके परिणाम स्वरूप रक्त में इंसुलिन एवं टेस्टोस्टेरॉन नामक पुरुषों के हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है। मोटापा, आरामदेय जीवनशैली एवं परिवार में मधुमेह की शिकायत के कारण इससे ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

pcos symptoms hindi

पी.सी.ओ.एस. के मुख्य लक्षण?

  • अनियमित व देरी से माहवारी (35 दिवस से अधिक का मासिक चक्र) (Irregular or no menstrual periods.)
  • अत्याधिक रक्त स्त्राव या बस छींटे दिखना। (Heavy periods or no periods)
  • चेहरे एवं शरीर पर बालों का अधिक विकास। (Excess body and facial hair)
  • मुहाँसे, तैलीय त्वचा एवं रूसी। (Acne, Oily skin, Dandruff)
  • बालों का झड़ना व गंजापन। (Hair fall and Alopecia)
  • श्रोणीतल में दर्द बने रहना। (Chronic Pelvic Pain)
  • गर्दन, बगल, जाँघ व ऊंगली की गांठ के स्थान पर कालापन।(Acanthosis Nigricans).
  • गर्दन, बगल व जाँघ की त्वचा पर अतिरिक्त उत्पत्ति। Skin tags on armpits and neck.
  • मोटापा एवं अत्याधिक भूख लगना। भरसक प्रयासों के बावजूद वजन कम ना होना। किंतु 15 प्रतिशत महिलायें दुबली हो सकती हैं। (Obesity and food craving. Patient may have difficulty to lose weight in spite of vigorous efforts. However, 15 % females may be thin.)
  • नींद में खुर्राटे आना व साँस रूक जाना। (Obstructive sleep apnea)
  • मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना व ह्रदयरोग। (Type II diabetes, high cholesterol, high blood pressure, heart disease)
  • मानसिक तनाव व चिड़चिड़ापन। (Mood disorders and irritability)

उक्त लक्षण और किन रोगों के कारण हो सकते हैं ?

  • ऐड्रनल ग्रंथी के विकार।
  • थॉयराईड ग्रंथी के विकार।
  • रक्त में प्रोलेक्टिन नामक हार्मोन की अधिकता।

पी.सी.ओ.एस. का निदान कैसे किया जाता है?

सर्वाधिक प्रचलित रोटरडेम नियम जो कि यूरोपियन एवं अमेरिकन संस्थाओं से भी सहमति प्राप्त हैं, के अनुसार निम्न तीन में से कोई भी दो लक्षण उपस्थित होने पर उक्त महिला को पी.सी.ओ.एस. से ग्रसित माना जाता है।

1- अण्डे के उचित समय पर ना फूटने के कारण अनियमित व देरी से माहवारी (35 दिवस से अधिक का मासिक चक्र) (Irregular or no menstrual periods.)

2- रक्त में टेस्टोस्टेरॉन नामक पुरुषों के हार्मोन की मात्रा अधिक होने के कारण संबंधित लक्षणों का या जाँचों में अधिकता पाया जाना।

3- सोनोग्रॉफी या लेप्रोस्कोपी में अण्डकोशिकाओं में सतही छोटे-छोटे बुलबुले नुमा सिस्ट का पाया जाना।

pcos11

पी.सी.ओ.एस. का उपचार कैसे किया जाता है?

पी.सी.ओ.एस. का संपूर्ण उपचार संभव नहीं है। चूंकि यह चयापचय (Metabolic disorder) संबंधित विकार है, इसका प्रमुख उपचार जीवनशैली में सुधार, दवाईयों व शल्यचिकित्सा के माध्यम से किया जाता है। सफलतापूर्वक वजन घटाना मासिक चक्र को नियमित करने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।

management punch of PCOS Hindi

  • पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम पी.सी.ओ.एस. का मूल उपचार है।
  • वे महिलायें जो निकट भविष्य में गर्भाधान नहीं करना चाहती, उनके लिए गर्भनिरोधक दवाईयाँ मासिक चक्र नियमित करने के साथ ही अन्य लक्षणों में फायदा पहुँचाती हैं। हालांकि, दवाईयाँ रोकने के बाद वे लक्षण पुनः आ सकते हैं।
  • मेटफॉरमिन नामक दवाई शारिरिक कोशिकाओं में इंसुलिन हार्मोन के प्रति प्रतिरोध कम कर उसकी क्रीयाशीलता बढ़ाती है और पी.सी.ओ.एस. संबंधित विकार का समाधान करती है। यह दवाई विशेषकर मोटापे से ग्रसित महिलाओं में अधिक लाभकारी सिद्ध होती है।
  • टेस्टोस्टेरॉन नामक हार्मोन के विरुद्ध क्रीयाशील दवाईयाँ भी मुँहासों एवं अनचाहे बालों के इलाज में उपयोग की जाती हैं। किंतु गर्भाधान के लिए प्रयासरत महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • निःसंतानता के उपचार हेतु अण्डों के विकास के लिए प्रेरक दवाईयों का उपयोग किया जाता है।
  • शल्यक्रिया का प्रयोग अंतिम उपचार के रूप में किया जाता है, जिसमें अण्डकोशिकाओं में महीन छिद्र किये जाते है। हालांकि अति उत्साहित उपचार में अण्डकोशिका नष्ट होने का भय रहता है।

पी.सी.ओ.एस. से ग्रसित महिलाओं में कौन से रोग होने की संभावना होती है?

पी.सी.ओ.एस. से ग्रसित महिलाओं में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कॉलेस्ट्रॉल की अधिकता, ह्रदयरोग, गर्भाशय के कैंसर इत्यादी होने की संभावना अधिक होती है।

पी.सी.ओ.एस. गर्भावस्था को कैसे प्रभावित कर सकती है?

पी.सी.ओ.एस. से ग्रसित महिलाओं को गर्भावस्था में गर्भपात, गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप, गर्भावस्था प्रेरित शर्करा (मधुमेह), समयपूर्व प्रसव व सीज़ेरियन डिलेवरी की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भावस्था में पी.सी.ओ.एस. का उपचार कैसे किया जाता है?

गर्भावस्था में भी पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम पी.सी.ओ.एस. का मूल उपचार है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ, अमेरिका के अनुसार गर्भावस्था में मेटमॉरफिन पूर्णतः सुरक्षित है एवं यह माँ व शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक है। अतः चिकित्सक की निगरानी में पूरी गर्भावस्था में इसका उपयोग सुझावपूर्ण है।

pcos metformin in pregnancy

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



 PCOS and Pregnancy!

Polycystic ovary syndrome (PCOS) is the most common endocrine disorder among women between the ages of 18 and 44 affecting 10-20 % of females. It is one of the leading causes of menstrual irregularity and poor fertility.  The PCOS can also affect the pregnancy adversely.

What is the cause of PCOS?

Exact cause of PCOS is not known. However, it is due to a combination of genetic and environmental factors. The basic pathology of PCOS is believed to be due to insulin resistance and hyperinsulinemia leading to elevated male hormones in females and erratic female hormonal milieu.

Risk factors include obesity, not enough physical exercise, and a family history of someone with the condition.

What are the symptoms of PCOS?

PCOS symptoms english

The symptoms are:

  • Irregular or no menstrual periods.
  • Heavy periods or no periods.
  • Excess body and facial hair,
  • Acne, Oily skin, Dandruff.
  • Hair fall (Alopecia) and thin scalp hair.
  • Pelvic Pain,
  • Difficult getting pregnant,
  • Patches of thick, darker, velvety skin at nape of neck, arm-pits, and groin or over knuckles (Acanthosis Nigricans).
  • Skin tags on armpits and neck.
  • Obesity and food craving. Patient may have difficulty to lose weight in spite of vigorous efforts. (However, 15 % females may be thin.)
  • Obstructive sleep apnea,
  • Type II diabetes, high cholesterol, high blood pressure, heart disease,
  • Mood disorders.

What other diseases can cause similar symptoms?

  • Adrenal pathology.
  • Hypothyroidism
  • Increased Prolactin levels in blood.

Can Polycystic Ovarian Syndrome (PCOS) Place A Woman At Risk For Any Other Conditions?

Women who have been diagnosed with PCOS seem to be at a greater risk of developing endometrial cancer, diabetes, high blood pressure, high cholesterol, and heart disease. Getting symptoms controlled as soon as possible can decrease a woman’s chance of developing any of these other conditions.

How is PCOS diagnosed?

The most popular Rotterdem’s criteria which is supported by European society of Human Reproduction and Endocrinology (ESHRE) and American Society of Reproductive Medicine (ASRM) considers presence of two out of 3 criteria in the absence of any other cause as diagnosis of PCOS.

  1. Oligoovulation (wherein egg ruptures late or not at all leading to menstrual cycle more than 35 days).
  2. Excess Androgen activity (Clinical markers such as central obesity, acne, acanthosis, hirsuitism, alopecia etc or Biochemical marker such as excess Sr. Testosterone or DHEAS in blood).
  3. Polycystic appearance of ovary in USG or Laparoscopy. (small fluid filled cystic structures arranged peripherally in ovary like a pearl necklace.)

pcos11

How is PCOS treated?

PCOS has no permanent cure. However, since it is a metabolic disorder it can be controlled with lifestyle changes such as weight loss and exercise. Successful weight loss is the most effective method to regulate the cycles.

management Punch of PCOS English

    • Diet modification and Regular exercise is the primary treatment of PCOS by regulating insulin resistance.
    • In women who are not trying to conceive, Birth control pill (Combined Oral Contraceptive pills)may help in regulation of periods, excess hair growth, and acne. However the symptoms may recur after stopping  the pills.
    • Metformin is a insulin sensitizing drugs that help by correcting pathophysiology of insulin resistance and especially is helpful in pcos patients with obesity and increased BMI.
    • Anti-androgens drugs like spironolactone helps to regulate symptoms caused by excess androgen activity. These medicines should only be prescribed if the woman is not trying for pregnancy.
    • Ovulation induction drugs may be prescribed for ovulation induction for assisted reproduction.
    • Surgery is the last resort with limited benefits. Controlled ovarian drilling may be helpful by reducing the levels of testosterone and increasing the ovulation. However, vigorous drilling may destroy the significant portion of ovary and leads to ovarian failure.

How Can Polycystic Ovarian Syndrome (PCOS) Affect Pregnancy?

Women who have PCOS appear to have an increased risk of miscarriage, pregnancy induced hypertension, gestational diabetes, premature delivery and increased risk of cesearean delivery.

How is pcos managed in pregnancy?

The primary management of PCOS in pregnancy is again diet modification and regular exercise under the guidance of Obstetrician and Dietcian.

According to National institute of health, USA, the use of metformin throughout pregnancy in women with PCOS has shown to reduce the risk of complications to both mother and fetus.

Metformin is a category II drug where benefits in pregnancy outweighs the risk.

pcos metformin in pregnancy

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.