प्रसवक्रिया (Parturition or Labour Pains)

प्रसवक्रिया (Parturition or Labour Pains)

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जीवन-क्षम आयु के गर्भ को गर्भाशय से योनिपथ के माध्यम से बहिःनिष्कसन के लिए स्त्री जननांगों में होने वाले घटनाक्रम को प्रसवक्रिया कहा जाता है। चूंकि, इस प्रकरण में माता को पीड़ादायक परिश्रम करना पड़ता है, इसे लेबर पेन भी कहा जाता है। इसे पार्टयूरिशन या नार्मल या वजायनल डिलेवरी भी कहते हैं।

वास्तविक प्रसव को दो प्रधान वर्गों में बांटा जा सकता है –

  1. प्राकृत प्रसव (Eutocia/Normal/Physiological Labour)
  2. वैकृत प्रसव (Dystocia/Abnormal/Pathological Labour)।

प्राकृत प्रसव –

निम्न मानक पूर्ण होने पर प्रसव को प्राकृत प्रसव कहते हैं-

  • गर्भकाल पूर्ण होने पर (Full term i.e. 37 Completed weeks to 41 weeks of Gestational Age),
  • स्वतः प्रारंभ होना (Spontaneous),
  • योनिमार्ग (Vaginal Route) के द्वारा,
  • शिशु अवाक् सिर होकर (Cephalic Presentation), मध्य शीर्ष का उदय लेकर (Vertex Position) बहिःनिष्कासन होना,
  • न्यूनतम चिकित्सीय सहायता के साथ (Minimum Intervention),
  • प्रसूता एवं शिशु को बिना किसी जटिलता के (Without Maternal or Fetal Complications)
  • उचित समयसीमा में परिपूर्ण होना (Within Stipulated Time Frame)।

वैकृत प्रसव –

उक्त कसौटियों से विचलन वैकृत प्रसव कहलाता है।

भ्रामक प्रसव क्या है?

गर्भाशय के अनियमित संकुचन जो कि वास्तविक प्रसव पीड़ा प्रारंभ होने के पूर्व महसूस होते हैं, उन्हें भ्रामक प्रसव पीड़ा या ब्रैक्सटन हिक संकुचन कहते हैं। इनके माध्यम से ही गर्भाशय वास्तविक प्रसव की तैयारी करता है।  यह प्रायः गर्भावस्था के मध्य अर्ध से प्रारंभ हो जाते हैं। किंतु इनसे ग्रीवामुख या शिशु के स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

भ्रामक प्रसव और वास्तविक प्रसव?

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सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



Parturition / Labor Pains

Parturition or Childbirth is the process of delivering the baby and placenta from the uterus to the outside world through the vaginal route. Since, it involves painful, laborous efforts of the mother, it is also called as Labor pains.

Classification of True Labor Pains:

1- Eutocia/Normal/Physiological Labor.

2- Dystocia/Abnormal/Pathological Labor.

Normal Labor-

The normal labor is defined as one in which:

  • The fetus is Full term i.e. 37 Completed weeks to 41 weeks of Gestational Age,
  • Baby’s lie is longitudinal, presentation cephalic, vertex position with flex attitude,
  • Labor begins Spontaneous,
  • Baby delivers vaginally,
  • Requires minimum intervention,
  • Without Maternal or Fetal Complications,
  • Within Stipulated Time Frame.

Abnormal Labor:

Any deviation in childbirth from above criteria are considered as Dystocia or Abnormal Labor.

What are False Labor Pains?

The false labor pains are the irregular uterine contractions that a mother may experience before the true labor begins. These are also known as Braxton Hicks contractions. These are perfectly normal and might start to occur from mid of pregnancy onwards. They do not cause any changes in cervix or descent of baby. They are body’s way of getting ready for the “real thing.”

False vs True Labor Pains?

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Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.