प्रसव की अवस्थाऐं। (Stages of Labour)

प्रसव की अवस्थाऐं। (Stages of Labour)

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जीवन-क्षम आयु के गर्भ को गर्भाशय से योनिपथ के माध्यम से बहिःनिष्कसन के लिए स्त्री जननांगों में होने वाले घटनाक्रम को प्रसव-क्रिया कहा जाता है। सामान्यतः प्रसव में होने वाले घटनाक्रम को चार अवस्थाओं के अंतर्गत वर्णित किया जाता है।

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  1. प्रसव की प्रथम अवस्था या आसन्ना प्रसवावस्था (First stage of labour)-

1st stage

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यह वास्तविक प्रसव वेदना के प्रारंभ से लेकर गर्भाशय ग्रीवा की पूर्ण लंबाई का विलोपन तथा पूर्ण विस्फार होने तक माना जाता है। प्रथम गर्भा में पहले विलोपन होता है, और फिर ग्रीवा मुख खुलना प्रारंभ होता है। किंतु बहुगर्भा में यह दोनों क्रियाऐं परस्पर साथ होती हैं।

इस अवस्था में शिशु का सिर योनि मार्ग में मामूली अग्रसर होता है।

इसे दो वर्गों में बांटा जाता है-

क. अस्कती अवस्था (Latent phase of Labour)-

  • यह वास्तविक प्रसव वेदना प्रारंभ होने, जब ग्रीवा मुख बंद होता है, से लेकर लगभग ग्रीवा मुख तीन सें.मी. खुलने व लंबाई 80 प्रतिशत कम होने तक माना जाता है।
  • इस अवस्था के दौरान प्रसव वेदना की प्रवृत्ति स्थाई, नियमित, तीव्र व अधिक अवधि की होने लगती है। परिणामस्वरूप ग्रीवा मुख लगभग 0.2 से 0.3 से.मी. की गति से खुलता है।
  • यह अनिश्चित्कालीन अवस्था प्रथम गर्भा में 10 से 12 घंटे की व बहुगर्भा में 6 से 8 घंटे की हो सकती है।
  • इस दौरान प्रसूता की योनि से रक्तमिश्रित श्लेष्मल थक्का निष्कासित हो सकता है।

 

ख. सक्रीय अवस्था (Active Phase of Labour)-

  • यह अवस्था ग्रीवा मुख तीन सें.मी. खुलने व लंबाई 80 प्रतिशत् विलोपन होने से लेकर पूर्ण 10 सें.मी विस्फार व पूर्ण विलोपन होने तक माना जाता है।
  • प्रथम गर्भा में इस दौरान लगभग 1 सें.मी. प्रति घंटा व बहुगर्भा में लगभग 2 सें.मी. प्रति घंटे से ग्रीवामुख खुलता है। अतः यह क्रमानुसार प्रथमगर्भा में लगभग 6-10 घंटे व बहुगर्भा में लगभग 3-6 घंटे की हो सकती है।
  • अगर कभी भी ग्रीवा मुख खुलने की गति अधिकतम अनुमानित समय से भी 2 घंटे विलंभ से होती है, तो चिकित्सक को सक्रीय भूमिका निभानी पड़ सकती है।

2. प्रसव की द्वितीय अवस्था- (Second stage of labour)-

7h

  • यह अवस्था ग्रीवामुख के पूर्ण विस्फार से प्रारंभ होकर गर्भ के निष्क्रमण तक होती है।
  • इसकी समयसीमा प्रथमगर्भा में प्रायः 2 घंटे व बहुगर्भा में अधिकतम 1 घंटे की होती है।
  • इस अवस्था में प्रसव वेदना अति तीव्र, प्रति 2-3 मिनिट में, व लगभग 1- 1.5 मिनिट तक रहती है।
  • अंतिम क्षणों में प्रसूता को मलत्याग की तीव्र इच्छा व गुदा द्वार पर जोर महसूस होता है। शिशु के निष्कासन के लिए उसे स्वेच्छा से जोर भी लगाना पड़ता है।
  • प्रत्येक वेदना के परिणामस्वरूप शिशु योनि मार्ग में नीचे खसकता जाता है व अंत में समापन (Crowning) के साथ उसका मस्तक योनिद्वार को चौड़ा करता है।

 

3.  प्रसव की तृतीय अवस्था- (Third stage of labour)

3rd

  • यह अवस्था गर्भ निष्क्रमण के पश्चात् प्रारंभ हो अपरा तथा गर्भकलाओं के पतन तक मानी जाती है। इसकी समय सीमा लगभग 15-30 मिनिट तक होती है।
  • शिशु के जन्म के साथ ही ऑक्सीटोसिन नामक अंतःस्त्राव के प्रभाव में गर्भाशय संकुचित होकर सिकुड़ जाता है ताकि ऑवल प्रथक हो सके और रक्त स्त्राव नियंत्रित हो सके।
  • साधारणतः इस अवस्था में 200-300 मि.ली रक्तस्त्राव होता है। प्रसूति पश्चात् 500 मि.ली. से अधिक रक्तस्त्राव होने की अवस्था में प्रसूता को रक्ताल्पता या अत्याधिक होने पर प्राणघातक भी हो सकता है।

 

  1.  प्रसव की चतुर्थ अवस्था- (Fourth stage of labour)

अपरा आदि के पूर्ण पतन के बाद लगभग 1 घंटे की यह अवस्था है, जिसमें प्रसूता की सामान्य शारिरिक स्थिति तथा प्रसवोत्तर रक्तस्त्राव, गर्भाशय के संकुचन, हृदयगति एवं रक्तचाप के बारे में विशेष ध्यान दिया जाता है।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 




Stages of Labor!

The series of events that happen in the reproductive tract of mother during the process of childbirth, to deliver the baby from intrauterine life into the world are labelled as Stages of Labor.

Classification of Stages of Labor:

The entire process of Labor pain is classified into four stages.

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1- First stage of labour-

1st stage

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The first stage of labor lasts from onset of true labor pains to complete effacement and full dilatation of cervix. In primigravida, the effacement precedes dilatation, whereas in multipara, both the events occur together.

There is often little descent of fetal head during first stage.

Classification of first stage:

A- Latent phase of Labour-

  • This phase lasts from onset of true labor when there is neither dilatation nor effeacement of cervix to around 80% effacement (taken up of cervix by lower uterine segment) and 3 cm dilatation of cervix.
  • During this phase, the uterine contractions become more stable, regular, increase in frequency and lasts longer.
  • The cerix usually dilates @ 0.2 -0.3 cm/hr.
  • Its duration is uncertain and may lasts 10-12 hours in primigravida and around 6-8 hours in multipara.
  • The patient may experience show (blood mixed mucoid discharge) from the vagina.

B- Active Phase of Labour-

  • This phase lasts from 80% effacement and 3 cm dilatation of cervix to complete effacement and full dilatation of cervix ( i.e. 10 cm).
  • The cervix usually dilates @ 1 cm/hr in primigravida and @ 2cm/hr in multipara.
  • It lasts approximately 6-10 hours in primigravida and 3-6 hours in multipara.
  • If this phase takes more than 2 hours than estimated time, then the progress of labor needs evaluation.

2. Second stage of labour-

7h

  • This phase lasts from complete effacement and full dilatation of cervix until delivery of baby.
  • It maximum lasts 2 hours in primigravida and around 1 hour in multipara.
  • The uterine contractions are regular, frequent occuring every 2-3 minutes, more intense and lasts longer around 1-1.5 minutes.
  • During the later stage, the mother may experience the sensation of defecation and bearing down.
  • With every contractions, the fetal head descent down the vagina and ultimately leads to crowning of fetal head through vulval opening.

3.  Third stage of labour

3rd

  • This phase lasts from delivery of baby until complete expulsion of placenta and fetal membranes.
  • It usually lasts for 15-30 minutes in both multi and primigravida.
  • Immidiately after the delivery of baby, the uterus contracts and retracts under the influence of oxytocin hormone and leads to separation of placenta from its bed and subsequently its expulsion. The compression of spiral arteries due to contraction of uterus controls blood loss.
  • The usual blood loss during this phase is around 200-300 ml. However, if the blood loss is severe and more than 500 ml, it can lead to anemia and can be fatal, adversely affecting the mother.

4-  Fourth stage of labour-

  • This phase lasts from complete expulsion of placenta and fetal membranes to 1 hour post delivery.
  • During this phase, special attention is given to monitor the mother’s blood loss, heart rate, blood pressure, uterine contractions etc.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.