गर्भावस्था में मतली एवं उल्टी। (Nausea & Vomiting in Pregnancy)

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गर्भावस्था में अधिकांश महिलाऐं प्रथम तिमाही में मतली से ग्रसित होती है। प्रायः यह चौथे माह में ठीक हो जाती है। किंतु, कुछ महिलाओं में यह गर्भकाल के संपूर्ण  नौ माह तक परेशानी का कारण हो सकती है।

गर्भावस्था में मतली का कारण –
विभिन्न रसायनों विशेषतः प्रोजेस्ट्रॉन, ईस्ट्रोजन एवं रिलेक्सिन नामक हार्मोन के प्रभाव में ना केवल मस्तिष्क में उपलब्ध मतली का केंद्र उत्तेजित हो जाता है, बल्कि आहार नाल व पेट के बीच की संकोचिनी मांसपेशियों का दबाव कम होने से आहार पुनः ऊपर की ओर आकर मतली एवं उल्टी पैदा करता है। आहर नली में अतिरिक्त रक्त प्रवाह के कारण सामान्यतः कभी कभी खून की उल्टी हो सकती है।

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प्रकृति ने इन अंतःस्त्रावों में मतली उत्पन्न करने की क्षमता इसलिए दी है ताकि, माँ भूलवश भी ऐसे किसी खाद्य पदार्थ का सेवन ना कर ले जिसके दुष्प्रभाव फलस्वरुप निर्माणाधीन अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव से शिशु में विकृति या गर्भपात का भय हो।

हायपरऐमेसिस ग्रेविडेरम (Hyperemesis Gravidarum)

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अगर मतली की तीव्रता अस्वाभाविक रूप से अत्याधिक है, कि, माँ को पानी या आवश्यक तत्वों की कमी होने के कारण शारिरिक कमजोरी हो रही हो, पेशाब का रंग गाढ़ा पीला और मात्रा औसतन 400 मि.लि. प्रति दिन से कम हो या माँ का वजन 5 प्रतिशत तक कम हो गया हो तो उसे हायपरऐमेसिस ग्रेविडेरम (Hyperemesis Gravidarum) कहते हैं। ऐसे में गर्भवति के यथाशीघ्र उपचार की आवश्यकता है। एक से अधिक गर्भ होने की स्थिति में एच.सी.जी. नामक हार्मोन की रक्त में अधिकता के परिणाम स्वरुप मतली व उल्टी की समस्या बढ़ जाती है।

मतली कम करने के सुझाव –

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  1. प्रातः खाली पेट मतली ज्यादा होती है। अतः माँ प्रातः उठते से 1 कप दूध के साथ दो बिस्किट व टोस्ट का सेवन करने के पश्चात् ब्रश करती है, तो उसे मतली का अनुभव कम होता है।
  2. यह देखा गया है कि, गर्भावस्था में कई बार विशेष गंध या स्वाद से मतली अधिक होती है। अतः उत्तेजक तत्वों, अत्याधिक तेल/ वसा युक्त, तीखे या अपचनीय पदार्थों का सेवन ना करने से मतली को रोका जा सकता है।
  3. नियमित अंतराल में थोड़ा – थोड़ा खाद्य सेवन करने से फायदा होता है।
  4. भोजन के संग अत्याधिक पानी पीने के बजाय बीच के अंतराल में भरपूर पानी का सेवन करने से मतली कम भी होगी व पानी की कमी भी नहीं होगी।
  5. बाहर का खाद्य/पेय पदार्थ से टॉयफाईड या हैजा जैसे संक्रमण का भय होता है व उनसे मतली की समस्या बढ़ सकती है। अगर कभी भी घर से दूर जाने का अवसर हो तो सदैव उपने संग पानी व भोजन की वयवस्था करके चलना चाहिए।
  6. ईलायची, लौंग या चूसने वाली संतरे की गोली से मतली कम हो जाती है।
  7. अगर चौके में जाने या सोचने मात्र से अाप मतली का अनुभव कर रही हैं, तो आप अपने परिजनों से सहायता ले सकती हैं।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



Nausea & Vomiting in Pregnancy

Most women suffer from nausea and vomiting in the first trimester of pregnancy. Often it is relieved by the fourth month. However, some mothers may suffer from it through the pregnancy.
Cause of nausea and vomiting in pregnancy –
The increased production of estrogen, progesterone and relaxin hormone is responsible to cause nausea and vomiting in pregnancy. They stimulate the vomiting center in midbrain, along with relaxation of Gastro-Esophageal sphincter leading to regurgitation of food and nausea and vomiting. Due to increased vascularity, occassionally the vomitus can be blood stained.

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Mother Nature has given the power to cause vomiting to these hormones to prevent accidental ingestion of any harmful substance that can harm baby and mother. In multifetal gestation, due to increased production of HCG hormone, the severity of nausea and vomiting can increase.

Hyperemesis Gravidarum-

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The higher severity and intensity of vomiting can lead to deficiency of water, essential minerals, nutrients etc. along with weight loss. The main symptoms would be physical weakness,  weight loss more than 5 percent prepregnancy weight, lethargy, concentrated dark coloured urine, average urine output less than 400 ml/day

Tips to reduce nausea

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  1. Hunger and starvation leads to more nausea. Hence, as soon as the gets up, she should take few crackers/ toast along with a cup of milk. Frequent small meals reduce the morning sickness.
  2.  It is advisable to avoid stimulating factors that causes nausea & vomiting in pregnancy, like perticular odour or taste,  sight, oily junk food,
  3. Take frquent small meals.
  4. Drink plenty of water in the interval between two meals. But, do not over load yourself with water along with meals.
  5. Avoid outside food, due to the fear of gastrointestinal tract contamination and infections. Always carry your water bottle along with little snacks, so that you can avoid prolonged starvation and food poisoning.
  6. Keep mouth freshners, lollies or lozenges, as they reduces nausea sensation in pregnancy.
  7. If you are unable to do your regular kitchen related activities, don’t hesitate to seek help of other family members.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.