क्या प्रसवोपरांत पानी के पर्याप्त सेवन से माता को पेट व शरीर में सूजन आ जाती है ? (Does adequate water intake causes swelling in Post partum mothers?)

क्या प्रसवोपरांत पानी के पर्याप्त सेवन से माता को पेट व शरीर में सूजन आ जाती है ? (Does adequate water intake causes swelling in Post partum mothers?)

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वर्तमान में यह मान्यता पूर्णतः आधारहीन है। किंतु अनादिकाल में संभवतः इस के पीछे कुछ ठोस कारण अवश्य रहे होंगे।

संभव कारण –

कारण 1. –
स्टाॅरलिंग द्रव्य यांत्रिकि (Frank-Starling Equation of Blood Flow) नियम के अनुसार, रक्त धमनियों व अन्तरालीय कोशिकाओं के मध्य द्रव्य का प्रसारण मुख्यतः दोनों स्थानों पर उपस्थित द्रवस्थैतिक दाब (Hydrostatic Pressure) व प्रोटीन व अन्य तत्वों द्वारा उत्पन्न कोलाईड परासरण दाब (Colloid Oncotic Pressure) के सामंजस्य से निर्धारित होता है। इसे पौसूली (Poiseuille’s law of Fluid Mechanism) नियम भी कहते है।

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प्राचीन काल में दोयम दर्जा प्राप्त होने के कारण महिलायें, विशेषतः गर्भावस्था व प्रसूति के दौरान अधिक पोषण की आवश्यकता के बावजूद भी पर्याप्त पौष्टिक भोजन से वंचित रहती थी। जिस कारण शरीर में प्रोटीन व अन्य आवश्यक तत्वों की कमी स्वाभाविक थी। अतः रक्त धमनियों से द्रव्य अंतरकाशी कोशिकाओं में प्रसारित होकर शरीर में सूजन पैदा करता था। किंतु, अज्ञानता के कारण यह माना जाता था, कि यह अतिरिक्त द्रव्य पर्याप्त पानी पीने के कारण एकत्रित हुआ है।

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चूंकि उस समय, वैज्ञानिक ज्ञान के अभाव में सूजन कम करने के लिए जल के सेवन को कम करना ही एकमात्र संभव उपाय था, अतः संभवतः इस मान्यता का उदय हुआ होगा। पर वर्तमान समय में जब गर्भवति व प्रसूति महिला को समोचित सुविधायें व संपूर्ण इलाज उपलब्ध है, इस मान्यता के लिए कोई स्थान नहीं। विपरीत इसके कम पानी के सेवन से माता को कम दूध बनने की समस्या आ सकती है।

कारण 2.-
प्राचीन काल में कामगार वर्ग की कमी के कारण महिलाओं को प्रसूति पश्चात् शीघ्र ही काम पर लौटना पड़ता था। अगर माँ भरपूर पानी का सेवन करती तो, दूध का उत्पादन अधिक होता और शिशु को पशु के दूध पर रखना संभव नहीं हो पाता। और अगर आँचल संकुलित और कड़क हो जाता तो माँ को और वेदना होती।

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अतः प्रसूति माँ को कम पानी दिया जाता था, ताकि कम दूध के उत्पादन के कारण शिशु को शीघ्रतम पशु के दूध पर आश्रित किया जा सके और माँ अपने काम पर जल्द लौट सके।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 


Does adequate water intake causes swelling in Post partum mothers?

In modern medicine, this belief is completely baseless. But in ancient times, there might be some reason for its proposal. Let us make an attemp to demystify the reasons, if we can.

Hypothesis 1 –
According to Frank-Starling Equation of Blood Flow  and Poiseuille’s law of Fluid Mechanism, the net movement of water across the capillaries depends on the net pressure between the intravascular and extravascular compartment.

The two major forces that play an impotant role are – Hydrostatic Pressure, that forces the water out and the Colloid Oncotic Pressure of serum proteins that try to bring the water into the capillaries.

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In ancient times, the women were undernourished and deprived. They always had to consume the left over food. Even during the periods of pregnancy and childcare, they were never fortunate enough to have adequate nutritious diet. As a result, they suffered from nutrional deficiency and hypoproteinemia.

According to Poiseuille’s law, there was a net fluid shift from the intravascular compartment into the extravacular space leading to edema. In the absence of enough scientific research, the ancestors believed that, the adequate water intake is responsible for this swelling and edema. And they proposed that the parturient mother should be deprived of water, lest they would develop edema.edema

In present scenario, when the pregnant women gets proper antenatal care and diet, she no more suffer from hypoproteinemia and hence there is no net fluid shift leading to edema. In fact, the water deprivation can lead to decreased milk produciton and lactation failure.

Hypothesis 2 –

In ancient times, there was lack of labourer class women. The women were forced to resume their duties at the earliest, immidiately after childbirth. If she would consume adequate water, there would be plenty of milk production. When she would not be able to feed the baby on field, she would suffer from breast engorgement, pain and infection. In order to avoid the agony, she was deprived of adequate water intake, so that mik production is deficient and not only she would resume her work early, but also, breast engorgement and pain could be avoided.

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Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.