मासिक चक्र क्या है ? What is Menstrual Cycle?

menses

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मासिक धर्म एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से प्रजननक्षम आयुकाल (किशोरावस्था से लेकर रजोनिवृत्ति तक) के दौरान लगभग हर महिला नियमित मासिक अंतराल पर अपने योनीमार्ग से रक्तस्त्राव का अनुभव करती है। यह रक्तस्त्राव और कुछ नहीं, किंतु गर्भाशय की भीतरी परत होती है जो गर्भधारण और निषेचन के अभाव में झड़ जाती है ताकि नए संभावित डिम्ब हेतु नई परत बन सके।

यह ठीक वैसे ही होता है, जैसे हर बार बीजारोपण पूर्व एक किसान पुरानी मिट्टी के नवीनीकरण और भराई हेतु पूरी मिट्टी को ऊपर-नीचे करता है, ताकि नए बीज की बुआई से पूर्व मिट्टी उर्वरकता सुनिश्चित की जा सके।

चूंकि, दो मासिक धर्म के मध्य यह चक्र हिंदू कैलेंडर से लगभग 1 माह (28 दिवस) का होता है, इसलिए इसे मासिक चक्र कहते हैं।

मासिक चक्र के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तन?

डिम्बग्रंथियों का बाहृ तल घनाकार जननिक उपकला (Germinal Epithilium) के एकल स्तर से ढका रहता है जिनमें अण्डें स्थित होते हैं। वास्तव में भ्रूण में अण्डों का निर्माण योक सेक नामक तंतु में होता है, किंतु विकास के दौरान वे डिम्बग्रंथियों में स्थानांतरित हो जाते हैं।

जन्म के समय डिम्बग्रंथियों में लगभग 4 मिलियन आद्य-पुटक (Premordial Follicles) होते हैं। इनका आकार 0.25 – 1 मि.मी. तक होता है। इनमें से प्रत्येक में एक डिम्बाणु-प्रसूजन या अण्ड (Oogonium) होता है, जो कणीय कोशिकाओं के स्तर से युक्त होता है। ये कोशिकायें एक विशेष प्रकार की पीठिका कोशिकायें (Stromal Cells) होती हैं, जो अंतःस्त्राव का निर्माण करती हैं।

वयःसंधि काल (Puberty) से रजोनिवृत्ति तक प्रत्येक मासिक चक्र के दौरान लगभग 1000 आद्य-पुटक (Premordial Follicles)  सक्रिय होते हैं, जिनमें से लगभग 20 पुटक चयनित (Recruit) होते है, जिनमें से सर्वश्रेष्ठ पुटक परिपक्व होकर डिम्ब-पुटक (Graffian Follicle) के रूप में विकसित होता है। इसका आकार लगभग 1 से.मी. होता है। डिम्ब क्षरण (Follicule Rupture) के माध्यम से यह विदरित (Ovulation) होकर श्रोणी गुहा में मुक्त होता है। जहाँ से यह डिम्बवाहिनियों में उत्पन्न आकर्षक दाब (Negative Vaccum Pressure)  के कारण वाहीनियों के भीतर प्रवेश करता है।

डिम्बक्षरण के कुछ ही क्षण पहले प्राथमिक डिम्बाणुजनकोशिका (Primary Ovarian Follicle) अध-सूत्रण (Meiosis) की प्रक्रिया पूर्ण कर अपने पहले ध्रुवीय पिण्ड (Primary Polar Body) का त्याग कर देती है। फलतः उसकी नाभी में 46 के स्थान पर 23 गुणसूत्र (क्रोमोसोम) ही रह जाते हैं।

इस अण्डे की उम्र 24 घंटे होती है, इस दौरान यह गर्भनाल (Fallopian Tubes) से होते हुए गर्भाशय की ओर अग्रसर होता है। अपने इस आंशिक जीवनकाल के दौरान पुरूष संसर्ग से, अण्डा व शुक्राणु का मिलाप हुआ तो एक भ्रूण पनपता है। निषेचन (Fertilisation) प्रक्रिया में 23 क्रोमोसोम युक्त डिम्ब व समान गुण युक्त शुक्राणु मिलकर पुनः 46 क्रोमोसोम (23 क्रोमोसोम के जोड़े) युक्त निषेचित डिम्ब (Secondary Ovarian Follicle)  बनाते हैं, जो शीघ्र द्वितीय ध्रुवीय पिण्ड (Second Polar Body) का भी त्याग कर युग्मनज (Zygote) का रूप धारण करती हैं।

fertilisation

इस नवोदित बीज को प्रारंभिक पोषण देने के लिए अन्तःस्त्रावी रस (हार्मोनस्) के प्रभाव में गर्भाशय की अंदरूनी परत गर्भकला लगभग 1-1.5 से.मी. मोटी विकसित होती है

डिम्ब-पुटक (Graffian Follicle) डिम्बक्षरण पश्चात् ल्यूटिनिकरण (Leutinisation) प्रक्रिया के माध्यम से पीत-पिण्ड (Corpus Luteum) में परिवर्तित हो जाती है, जो ईस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रॉन नामक अंतःस्त्राव बनाते हैं।

निषेचन की अवस्था में प्रारंभिक भ्रूण स्वयं की सहायता हेतु विकासशील कनेरी के माध्यम से ह्युमन कोरियोनिक गोनेडोट्रॉपिन (Human Chorionic Gonadotropin) नामक अंतःस्त्राव बनाता हैं। यह हार्मोन पीत पिण्ड का विकास कर उसकी सक्रीयता लगभग 3 माह तक बनाए रखता है, जब तक भ्रूण ईस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन का निर्माण पूर्णतः स्वयं करने में सक्षम ना हो जाए। अतः इस दौरान माहवारी नहीं होती।

निषेचन के अभाव में पीत पिण्ड 10 दिवस के भीतर पतन होकर श्वेत-पिण्ड (Corpus Albicans) का निर्माण करता है, जो ईस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन का निर्माण करने में अक्षम होते हैं, और जिसके अभाव में अंतर्गर्भाशयकला या श्लैष्मिककला (Endometrim) मासिक स्त्राव के रूप में लगभग अठाईसवे दिन पर निष्किासित हो जाती है। ताकि नए बीज के लिए नई परत बन सके। इस रक्त स्त्राव को मासिक धर्म या माहवारी कहते है। चूंकि, यह चक्र हिंदू समयावली से लगभग 1 माह का होता है, इसलिए इसे मासिक चक्र कहते हैं। गर्भाधान होने पर पूरे नौ माह तक माहवारी नहीं होती।

साधारण माहवारी क्या होती है ?
अधिकांशतः मासिक चक्र 21 से 35 दिवस का होता है। मासिक धर्म के 2 से 6 दिवस में लगभग 50 से 80 मिलिलीटर (2-3 मध्यम आकार के सेनिटरी पेड प्रति दिन) रक्त स्त्राव होता है। माहवारी के दौरान, चूंकि, 1.5 सें.मी. की मोटी परत लगभग 1 मि.मी के छिद्र से निष्कासित होती है, अतः साधारणतः मामूली सा दर्द होता है।
dysmenorrhoea
माहवारी से जुड़ी कुछ भ्रांतिया!

1. क्या मासिक रक्त स्त्राव गंदा खून है ?
उ- नहीं, यह कतई गंदा खून नहीं है। यह तो वस्तुतः शुद्ध व अतिआवश्यक तत्वों युक्त रक्त है, जो प्रारंभिक भ्रूण को पोषण देने के लिए बनता है।

2. क्यों मासिक में अलग सुलाया जाता है ? तुलसी को पानी नहीं दिया जा सकता ? मंदिर या धार्मिक कार्यों से दूर रहा जाता है ?
उ- हमारे पूर्वज महिलाओं के प्रति काफी संवेदनशील थे। चूंकि, मासिक के दौरान कई महिलाओं को काफी वेदना होती है, अतः उन्होनें यह प्रथा बनाई की महिलाओं को पारिवारिक दैनिक कार्यों से थोड़ा आराम मिल सके उन्हें चौकें या बाकी गृहस्थी के कार्यों से मनाही की। उन्हें प्रातः जल्दी ना उठना पड़े, तो मंदिर या तुलसी को भी पानी देने से मना कर दिया। व पति पीड़ा में संभोग के लिए जोर ना दे, तो बिस्तर भी अलग लगाने को सुझाव दिया।
अतः सामाजिक या धार्मिक कारणों से अनावश्यक दवाइयों द्वारा मासिक धर्म को टालना या समयपूर्व लाने का प्रयास निंदनीय है व हमें समाज की अवधारणा को चेतना द्वारा बदलना चाहिए।

3. क्या रक्त स्त्राव में घर में ही बने कपड़े के नेपकीन उपयोग करना चाहिए ?
उ- बाजार में उपलब्ध साफ सुथरे सेनिटरी पैड सुरक्षित व सरल उपयोगी हैं। उल्टा घर के बने कपड़े के नेपकीन असुरक्षित होते हैं, क्योंकि उनके महीन रेशों में जीव उत्पत्ति हो सकती है।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



What is Menstrual Cycle?

Menstruation is a normal, natural phenomenon that every female experiences during the reproductive age (from Adolescence to Menopause) during which she has regular monthly bleeding per vaginum.

This menstrual blood is the inner endometrial lining of the uterus which was developed to give nourishment to the anticipated embryo. But in the absence of fertilization and implantation, the lining sheds in the form of menses so that new lining is formed for next new egg.

It is exactly for the same reasons that the farmers plough the soil to replenish it before seeding.

As the duration between the two menstruation is around 1 lunar month (28 days), the menstrual cycle is also called as Lunar Cycle.

What is the physiology of Menstrual cycle?

In females, the eggs are present in Germinal layer of ovary. Actually the eggs are formed in fetal life in yolk sac and then transmigrated to ovary during its development. There the eggs remain dormant till puberty.

At birth, the ovaries contain approximately 4 million immature Premordial Follicles. Their sizes range from 0.25 to 1 mm. Each primordial follicle contains an egg in its core surrounded by layers of stromal cells. The stromal cells produce hormones- Estrogen and Progesterone.

From Menarche (beginning of menses) at puberty until Menopause (Cessation of menses) every month approximately 1000 primordial follicles begin to develop out of which 20 are recruited for further development. The best amongst them takes the lead and mature into Graffian follicle of about 1 cm size.

At middle of the cycle around 14th day, the mature follicle ruptures to release the egg free into the peritoneal cavity. This process is called as Ovulation. This free egg along with its surrounding stromal cells is picked up by the fallopian tubes through the negative suction pressure.

After ovulation the released egg undergoes the process of sexual/reduction division called Meiosis and forms Primary ovarian follicle and primary polar body which contains 23 chromosomes each instead of 46. Since they contain half the number of inherited chromosome, they are called haploid cells. The life of this egg is approximately 24 hours.

During this period of survival, the haploid egg and sperm may fertilize at the ampullary part of fallopian tube to form a single diploid zygote that contain normal number of 46 chromosomes. This zygote then travels to the uterine cavity for implantation and further development into embryo.

fertilisation

To provide initial nourishment to the developing zygote, the inner endometrial lining of the uterus grows approximately 1.5 cm thick under the influence of ovarian hormones estrogen and progesterone till the fetus forms its placenta.

The remnant of ovarian Graffian follicle undergoes process of leutinization to form the corpus luteum that produces estrogen and progesterone to support pregnancy. The life of corpus luteum is 10 days.

The embryo helps own survival by producing Human Chorionic Gonadotropin, that prolongs the life of corpus luteum by 3 months so that it can produce required hormones to support pregnancy till the placenta is formed and takes over.

In the absence of pregnancy and HCG hormone, the corpus luteum degenerates into corpus albicans, that do not produce progesterone hormone and hence the inner endometrial lining sheds in the form of menstrual blood. This is nature’s way to form a new endometrial lining for newer egg.

What is a normal menstrual cycle?

A normal menstrual cycle is of 21 to 35 days duration with an average total blood loss of 50 – 80 ml lasting 2 to 6 days.  The woman may experience little pain and discomfort during menses since almost 1.5 cm thick layer has to expel through a cervical os of 1 mm.

dysmenorrhoea

Facts & Beliefs associated with menstrual cycle?

  • Is Menstrual blood dirty?

Ans – Certainly not. In fact, it is rich in nutrients and oxygen to provide initial nourishment to the embryo. It is a pure blood.

  • In some religions, the menstruating woman is isolated from rest of the family, abandoned to visit temple or water holy plant Tulsi etc.?

Ans – In ancient times, the women did not enjoy the equal status in society. Our socialist ancestors were very sensitive towards empowerment of women against the prevailing customs.

Many women experience discomfort and pain during menses.  So, in order to provide them due care these rituals were propagated.

  • The women were refused to visit temple or water Tulsi so that they don’t have to get up early in morning.
  • They were isolated so that Husband does not force them for sexual relationship.
  • Their food was separately prepared to offer them fresh food rather than leftover.

So, it is advisable not to take medicines to delay the menstrual cycle on account of religious customs.

  • Homemade sanitary pads are better than those ready to use in market?

Ans- Ready to use sanitary pads available in market from good company is safe and simple. On the contrary, the home made pads when not cleaned, dried and ironed properly may harbor infection.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.