गर्भावस्था में सफेद पानी / धात (White discharge in Pregnancy)

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गर्भावस्था के दौरान प्रायः अनेक महिलायें कुछ हद तक सफेद पानी की शिकायत से ग्रसित हो सकती हैं। कुछ में ये गर्भावस्था संबंधित हार्मोनस् परिवर्तनों के कारण यौनी स्त्राव हो सकता है जबकि कईयों में यौन संक्रमण का द्योतक हो सकता है।

गर्भावस्था में योनी स्त्राव-

गर्भावस्था के दौरान अनेक हार्मोनस् विशेषकर ईस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन के प्रभाव में जननांगों में रक्तप्रवाह बढ़ जाता है। इसके फलस्वरुप वहाँ योनी मार्ग में स्थित ग्रंथियाँ श्लेष्मनुमा स्त्राव (Mucoid Vaginal Secretions) का निर्माण करती है। यह स्त्राव विशिष्ट ईम्यूनोग्लोब्यूलिन-आई. जी.-ऐ प्रतिरोधी तत्वों (Immunoglobulin-A Antibodies) में प्रचुर होती हैं जो यौन संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

सामान्य श्लेष्मनुमा योनी स्त्राव के लक्षण-

यह स्त्राव थूक समान, पारदर्शी, बिना गंध व सामान्य मात्रा का होता है, जिससे अंतःवस्त्रों पर निशान नहीं पड़ते। एवं इसके कारण गर्भवती को अन्य पीड़ा जैसे खुजली, जलन, दर्द इत्यादि नहीं होती।

असाधारण योनी स्त्राव के लक्षण-

  • दही समान सफेद, पीला, हरा या मठमैले रंग का, अत्याधिक तरल या गाढ़ा, बदबूदार स्त्राव, जिसके फलस्वरूप गर्भवती को असुविधायें जैसे खुजली, जलन, दर्द इत्यादि पीड़ा होती है, यौन संक्रमण दर्शाता है।

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  • अनियंत्रित और आकस्मिक तरल, पेशाब समान पानी का रिसना एम्नियोटिक थैली के फटने के कारण एम्नियोटिक द्रव्य का रिसाव हो सकता है।

संक्रमण के संभव कारण –

1- जननांग की अनुचित देखरेख के कारण गीलापन बने रहना।

योनी मार्ग सामान्यतः लैक्टोबैसिलस डोडरलीन नामक बैक्टेरिया से आच्छादित रहता है, जो कि योनी मार्ग में प्रचुर मात्रा में उपस्थित ग्लायकोजन से लैक्टिक एसिड का निर्माण कर योनी स्त्राव की प्रकृति को अम्लीय (pH 4.5) बनाये रखते हैं।

जहाँ एक ओर लघुशंक के दौरान पुरूषों में पेशाब शरीर से दूर निष्कासित होती है, वहीं महिलाओं में यह लघु भगोष्ठ (Labia Minora) को स्पर्श कर गीला करते हुए निष्कासित होती है।

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 आदतन महिलाऐं योनी मार्ग को धोती तो है, किंतु जल्दबाजी या जानकारी के अभाव में जननांगों को तद्पश्चात् पोछ कर सुखाती नहीं है। फलस्वरुप जननांगों में गीलापन बना रहता है। आद्रता के कारण वहाँ का अम्लीय pH क्षारीय बन जाता है और प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। परिणामस्वरुप रोगजनक बैक्टेरिया और कैंडिडल फंगल इंफेक्शन इत्यादि के लिए अनुकूल वातावरण पैदा होने से बार-बार यौन संक्रमण, सफेद पानी, खुजली, जलन, दर्द, यूरीन इंफेक्शन इत्यादि की शिकायत बनी रहती है।

यही संक्रमण योनी मार्ग से गर्भाशय की ओर अग्रसर होकर एम्नियोटिक थैली में छिद्र, एम्नियोटिक द्रव्य का रिसाव, गर्भपात, समय से पूर्व प्रसव या शिशु का गर्भ में ही आकस्मिक निधन का खतरा पैदा करता है।

देखा जाये तो अधिकांश समय पूर्व प्रसव और अपरिपक्व शिशुओं के जन्म को मात्र योनीमार्ग की उचित देखभाल, सूखा और साफ रखने की अच्छी आदत के माध्यम से रोका जा सकता है।

2- अंतःक्रीड़ा संबंधित यौन रोग – जैसे सिफिलिस, गोनोरिया, हरपीस इत्यादि।

3- सामुहिक स्थल पर अस्वच्छ बाथरूम व जल का उपयोग।

4- परिवार में सामुहिक कपड़े, अंतःवस्त्र, साबुन इत्यादि का उपयोग।

5- बिना चिकित्सीय सलाह के ऐंटिबॉयोटिक दवाईयों का उपयोग। अनुचित दवाईयों के प्रयोग से योनी मार्ग में स्थित सहायक लैक्टोबैसिलस बैक्टेरिया भी नष्ट हो जाते हैं और रोगजनक जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण उत्पन्न हो जाता है।

योनी मार्ग सूखा व साफ रखने के कुछ सरल उपाय –

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  • लघुशंका और स्नान पश्चात योनी द्वार को सर्वप्रथम कॉटन कपड़े और फिर टिश्यू पेपर से सूखा रखें। उसके बाद ही अंतःवस्त्रों को ग्रहण करें।
  • जननांग स्थित बालों को छोटा रखें।
  • संभवतः सामुहिक स्थलों पर शौचालयों का प्रयोग ना करें।
  • अंतःवस्त्रों को धूप में सुखाकर, प्रेस करने के बाद ही ग्रहण करें।
  • परिवार के सभी सदस्यों के अंतःवस्त्र प्रथक धुलने चाहिए।
  • एक – दूसरे के कपड़े, अंतःवस्त्र, साबुन इत्यादि का उपयोग ना करें।
  • जननांगों पर किसी भी प्रकार के पाउडर, परफ्यूम या रसायन का इस्तमाल ना करें।
  • हाथ के नाखून छोटे रखें।
  • अत्याधिक पसीना आने पर शीघ्र अंतः वस्त्र बदलें।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें।



White discharge in Pregnancy ?

Often, pregnant mothers suffer from white discharge per vagina. In some it may be due to pregnancy-related hormonal changes and increased blood supply to reproductive organs, whereas in others, it may be due to vaginal infections.

Vaginal discharge in pregnancy-

In pregnancy under the influence of various hormones, especially estrogen and progesterone, the blood supply to reproductive organs is significantly increased. As a result, there is an increased production of mucoid secretions from the vaginal glands. This secretion is rich in IgA immunoglobulins and offers protection against ascending vaginal infections.

Characteristic of normal vaginal secretions-

The normal physiological vaginal secretion is mucoid, translucent, without foul smell, in optimum amount and do not stain the undergarments. It do not cause any discomfort like pain, burning or itching.

Characteristic of abnormal vaginal secretions-

The excessive, copious, thick, curd-like or discolored discharge, that is foul smelling, stains the undergarments and causes discomfort, pain, burning or itching to the pregnant mother is abnormal and indicates infection.

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Involuntary leakage of urine-like copious discharge with sweetish smell from vagina may indicate premature rupture of amniotic membranes.

Causes of Genital Infection:

1- Moistness of Genitalia.

The vaginal tract is normally inhabited by favorable, parasitic Lactobacillus dodarceli bacteria, which produces lactic acid from the fermentation of Glycogen, present in abundance in vaginal mucosa. This maintains the acidic pH of vaginal secretions (pH value 4.5).

During urination, in Males the urine is ejected away from the body, whereas in Females, it wets the labia.

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As a common practice, the women usually clean the vulva by washing, but either due to rush of time or out of ignorance, seldom do they wipe it dry completely. As a result, the vulva remains moist most of the time.

Due to this inadvertent moisture, the normal pH of vagina becomes alkali, immunity lowers and favors secondary Bacterial and Fungal (Candidiasis) infections resulting in white discharge, itching, burning, pain and dysuria.

This ascending vaginal infection can lead to Chorioamnionitis, Preterm Premature Rupture of Membranes (PPROM), Amniotic fluid leak, Miscarriage, Preterm delivery, or Intra uterine fetal death (IUFD).

Hence, many miscarriages, preterm deliveries and premature babies can be prevented just by practicing proper perineal hygiene as discussed below.

2- Sexually Transmitted Infections like Syphilis, Gonorrhea, Herpes etc.

3- Use of public toilets and dirty water.

4. Use of common cloths and toiletries among family members leading to cross infections.

5. Irrational use of antibiotics lead to destruction of normal vaginal commensal bacteria – lactobacillus doderlein, leading to vulvo-vaginitis.

6. Frequent change of underpants when moist.

Simple methods to keep genitalia dry and clean.

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  • After every time you use toilet, dry the genitalia with cotton cloth followed by tissue paper and then wear under garments.
  • Keep pubic hair short.
  • As far as possible, avoid using public toilets.
  • Dry undergarments in sunlight and iron them before wearing.
  • Undergarments of family members should be washed separately.
  • Avoid interchangeable use of personal cloths and toiletries.
  • Do not use any kind of powder, perfume or chemicals at genitalia.
  • Keep your finger nails short.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. At most care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.