प्रसव क्रिया में पति का योगदान। ROLE OF HUSBAND IN LABOUR ROOM

प्रसव क्रिया में पति का योगदान। ROLE OF HUSBAND IN LABOUR ROOM

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जन्म हेतु प्रसव क्रिया के दौरान तय किया गया योनिमार्ग का 10 सें.मी. का रास्ता, किसी भी मनुष्य के लिए अपने संपूर्ण जीवनकाल का सबसे कठिनतम सफर होता है।
यह प्रसवकाल सभी के लिए अथक परिश्रम और तनाव का समय होता है। चाहे वह वेदना सहती प्रसूता हो, खुशियों की बाँठ जोहते पति और परिवार या फिर सेवा में लगे अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारीगण।

माता गर्भाशय के संकुचन और ग्रीवामुख के विस्फार के परिणामस्वरुप शारिरिक वेदना में होती है, पिता अपनी पत्नी की पीड़ा देख मानसिक वेदना से ग्रस्त, और प्रसव सहायक या चिकित्सक परिणाम की चिंता, संशय और भय से ग्रसित। इस संपूर्ण प्रसव प्रक्रिया के वेदना और अनिश्चितता से भरे होने के कारण इसे प्रसव वेदना या पीड़ा कहा जाता है।

वास्तव में देखा जाए तो परमात्मा नें शिशु को जन्म देने की यह अद्भुत किंतु वेदनीय क्षमता महिलाओं को इसलिए प्रदान की हैं, क्योंकि वे पुरुषों के मुकाबले शारिरिक, मानसिक और भावनात्मकरुप से अधिक सामर्थ्यवान होती हैं।

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जिस प्रकार आत्म-तृप्ति, पुरस्कार और शौहरत की चाह एक पर्वतारोही को हिमालय जैसे दुर्गम पहाड़ को चढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकती है, ठीक वैसे ही जीवन को जन्म देने का असीम सुख, नवजात का कोमल स्पर्श, मधुर किलकारी और समोचित परवरिश की आत्म-संतुष्टि के भाव प्रसूता को इस कठिन क्षण में धैर्य, दृढ़ता, मानसिक शांति और आत्म बल प्रदान कर सकते हैं।

प्रसवक्रीड़ा में वेदना सह कर शिशु को जन्म देना जरुर माँ का कार्य है, किंतु भावी पिता की भी कुछ जवाबदारियाँ होती हैं। इतिहास साक्षी है कि पति का सानिध्य और प्रोत्साहन प्रसूता को संबल प्रदान कर इस अप्रिय पीड़ादायक अवस्था को सुगम, सरल और सुखद अनुभव बना सकता है।

प्रसवकाल में पति की उपस्थिति से-

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  • प्रसूता को आत्मबल प्राप्त होता है।
  • दर्द निवारण होता है।
  • प्रसव काल की अवधि कम हो जाती है।
  • आपातकालिन अवस्था में निर्णय लेना सरल हो जाता है।
  • जन्म पश्चात नवजात और पिता में परस्पर स्नेह संबंध बनने में सहायता होती है।
  • संतति को जन्म देने हेतु पत्नि की प्रसव-वेदना और प्रयासों का परिदृश्य देख पति का पत्नि के प्रति सम्मान प्रगाढ़ होता है।

अतः विश्वभर में प्रसूतिगृह में पिता की उपस्थिति का प्रचलन जोर पकड़ रहा है। यहाँ तक की कई स्थान पर पिता की सहभागिता बढ़ाने के लिए शिशु की गर्भनाल भी उनसे कटाई जाती है।

प्रसूतिगृह में पिता की उपयोगिता बढ़ाने के कुछ उपाय –

1- प्रसवक्रिया प्रारंभ होने के पूर्व तैयारियाँ।

क- पत्नि और चिकित्सक से प्रसवक्रिया की योजना पर एवं निम्न बिंदुओं पर परिचर्चा अवश्य करें।

  • योनिमार्ग द्वारा नार्मल वज़ायनल डिलेवरी या सिज़ेरियन डिलेवरी के फायदे-नुकसान पर परिचर्चा। और वर्तमान परिस्थितियों में आपके केस में दोनों की संभावना क्या है?
  • डिलेवरी के दौरान संभावित आवश्यकतानुसार वेक्यूम कप (ventouse) या फॉरसेप (forceps) तकनीक की उपलब्धता, उपयोग करने की विशेषज्ञता और उनसे जुड़े मानकों का पालन।
  • प्रसव वेदना के दर्द निवारण हेतु औषधी या ऐपिड्यूरल ऐनॉलजेसिया की उपलब्धता और उनसे संबंधित नीति।
  • शिशु विशेषज्ञ, नवजात गहन चिकित्सा इकाई, रक्त कोष इत्यादि की उपलब्धता।
  • क्या आप प्रसूति कक्ष में पत्नि के समीप उपस्थित रह कर किसी भी रूप में योगदान दे सकते हैं, इस पर अवश्य परिचर्चा करें।

ख- अंतिम क्षणों की भगदड़ से बचने के लिए आपातकालीन बैग तैयार रखें।

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  • उसमें आपातकालीन धन, बीमा पॉलिसी, आवश्यक कागज़ात, संपर्क विवरण इत्यादि तैयार रखें।
  • प्रसूति ग्रह में लंबे समय रुकने पर भूखा ना रहना पड़े, अतः खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ, जल इत्यादि ले जाना ना भूलें। ( बिना चिकित्सीय सलाह के अपनी पत्नि को कुछ भी ग्रहण करने के लिए ना कहें, क्योंकि आकस्मिक सीज़ेरियन डिलेवरी की अवस्था में लगभग 4 से 6 घंटे भूखा और निर्जला रहना पड़ता है।)
  • रुचिकर किताबें, मैग्ज़िन, लैपटॉप इत्यादि आपका तनाव कम करने और समय काटने में मदद कर सकते हैं।
  • अतिरिक्त चादर और कंबल इत्यादि तैयार रखें।
  • अस्पताल में शिशु के लिए आवश्यक कपड़ों, दैनिक उपयोगी वस्तुओं, डायपर इत्यादि की उपलब्धतानुसार साथ रखना ना भूलें।
  • कैमरा – नवनिहाल की प्रथम मुस्कान किसी वरदान से कमतर नहीं होती, अतः उस सुखद पल को सहेज़ने के लिए कैमरा ले जाना ना भूलें। किंतु ध्यान रहें कि कोतुहलवश अपनी पत्नि की निज़ता को नुकसान ना पहुँचाऐं।

ग- स्टेम सेल बैंकिंग –

अगर आपने अपने शिशु की स्टेम कोषिकाओं और गर्भनाल को संग्रहित करने की व्यवस्था की है, तो प्रसूति के समय आवश्यक किट ले जाना तथा समय पर उक्त कर्मचारी को निर्देश देना ना भूलें।

2- प्रसवक्रिया के दौरान पति का योगदान-

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इन निर्णायक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण पलों में आपकी पत्नि को आपके सानिध्य की आवश्यकता सबसे अधिक होती है। वह आपके परिवार का वंश जो बढ़ा रही है। सिर्फ शाब्दिक नहीं, वरन् उसके वास्तविक हमसफर बनने और अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का यह एक स्वर्णिम अवसर है। इन अनिश्चितता से भरे पलों में उसे शारिरिक, मानसिक और भावनात्मक संबल प्रदान करें। स्वयं घबरायें नहीं और ना ही उसके आत्मविश्वास को ढगमगाने दें।

अगर आप चिंतित और अशांत प्रवृत्ति के स्वामि हैं, तो प्रसूति गृह से स्वयं को दूर रखें, अन्यथा आप अपनी बैचेनी से पत्नि और चिकित्सक को भी असमंजस में डाल देंगे। ऐसे में अपने अंदर हीन भाव भी पैदा ना होने दें, क्योंकि अपनी उपस्थिति द्वारा बाहर रह कर भी आप उनका उत्साहवर्धन और सहायता कर सकते हैं।

क- संपर्क सेतु बनें-

प्रसव वेदना के असहनीय कष्ट के कारण हो सकता है कि आपकी पत्नि असामान्य व्यवहार करे और दिशा-निर्देशों का पालन करने से मना करने लगे। ऐसी अप्रिय अवस्था में आप अपनी पत्नि और प्रसव सहायक के मध्य संपर्क सेतु बन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। परिस्थिति अनुसार चिकित्सक से प्रसव योजना और दर्द निवारण उपायों पर अवश्य चर्चा करें। किंतु अनावश्यक घबराहट और तनाव से बचें।
प्रसव प्रक्रिया की अनिश्चित जटिलता की अवस्था में, पूर्व-निर्धारित योजना से भिन्न निर्णय जैसे सिज़ेरियन डिलेवरी इत्यादि लेने में आपकी उपस्थिति सहायक हो सकती है।

ख- प्रेरक बनें –

आपका सानिध्य और प्रेरणा आपकी हताश, पीड़ित पत्नि का मनोबल अद्वितीय रुप से बढ़ा सकती है।

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  • आपका प्रेम भरा स्पर्श, माथे पर आलिंगन, हाथ-पाँव की कोमल मालिश, पीठ पर थपकी, हाथों की गर्माहट, मन बहलाने वाली पुरानी यादें या भविष्य की परिचर्चा आपकी पत्नी का ध्यान भटकाकर उसकी पीड़ा कम कर सकती है।
  • सौम्य, मनमोहक, मध्यम संगीत, गपशप या प्रेरणादायक कहानियाँ दर्दनिवारण में काफी सहायक हो सकती हैं।
  • अपनी पत्नि को अपने शिशु के लिए पत्र लिखने या संदेश रिकार्ड करने के लिए प्रेरित करें। इससे ना केवल उनका मन स्थिर हो वेदना सहने की क्षमता बढ़ेगी, साथ ही वर्षों बाद समझदार होने पर जब शिशु उन संदेशों को देखेगा तो उसका प्रेम और सम्मान अपने माता-पिता की संवेदनशीलता देख और बढ़ेगा।
  • आँखों में आँख डालकर अपनी पत्नि को यह आश्सवत करें कि वह सराहनीय रुप से हिम्मत रख रही हैं, और प्रसव का प्रत्येक दर्द उन्हें अपने शिशु के जन्म के और करीब ले जा रहा है।
  • उन्हें यह अहसास दिलाऐं कि आप उनसे असीम स्नेह करते हैं और वेदना की इस अपरिहार्य घड़ी में आप उनके साथ हैं।
  • हांलांकि, कुछेक महिलाऐं वेदना की इस घड़ी में एकांतप्रिय हो जाती हैं और वे किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से चिड़ने लग जाती हैं। ऐसे में उन्हें ये विश्वास दिलाऐं कि जब भी आवश्यकता पड़ेगी आप उपस्थित हैं।

आपका प्रेम, आत्म-विश्वास और विवेक आपकी पत्नि का आत्मबल बढ़ा सकता है। किसी भी अवस्था में उसे खोने ना दें, चाहे वह पत्नि की पीड़ादायक चित्कार हो, अंदरुनी परिक्षण, अजीबो-गरीब औज़ार या फिर ऐम्नियोटिक द्रव्य की थैली का फटना। कृप्या चिकित्सीय देखरेख और प्रबंधन में अवांछित हस्तक्षेप ना करें।

ग- सहारा बनें –

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  • अपनी पत्नि को टहलने, शौचालय जाने या हल्के व्यायाम करने में सहायता करें।
  • उन्हें प्रसव-पीड़ा के दौरान आरामदायक अवस्था में रहने में सहायता करें, जैसे खड़े रहना, आगे झुकना, घुटने के बल बैठना इत्यादि।
  • गर्मी लगने पर पंखा करें, माथे का पसीना पोंछे। ठंड लगने पर हाथ-पाँव की मालिश करें, कंबल प्रदान करें।
  • प्रसव की सक्रिय अवस्था में जब माँ को श्रोणितल पर जोर लगाकर शिशु को बाहर निष्कासित करने का निर्देश दिया जाये, तो उनके पैर बाहर और ऊपर की ओर ले जाने में सहायता करें।
  • उन्हें गर्भाशय के संकुचन के दौरान जोर लगाने और शिथिलता के दौरान लंबी गहरी सांस लेकर विश्राम करनें के लिए प्रेरित करें।
  • प्रसव क्रिया के अंतिम क्षणों में योनिमुख पर शिशु का मस्तक दिखने पर उन्हें आश्वस्त और प्रोत्साहित करें, कि कुछ पलों पश्चात उनका नवजात उनकी कोख में किलकारियाँ ले रहा होगा, बस संयम रख कर जोर लगाते रहें।

घ- धैर्यवान बनें-

प्रसव की असहनीय वेदना के कारण आपकी पत्नि आक्रमक और असामान्य व्यवहार कर सकती हैं, इसे उनके दुस्साहस और दुर्व्यवहार के रूप में व्यक्तिगत रूप से ना लें। धैर्य रख उनका आत्मबल बढ़ाऐं।

ङ- पिता बनें-

प्रसव सहायक हो सकता है कि आपसे गर्भनाल काट कर शिशु को ग्रहण करने का निवेदन करें। ऐसे में घबरायें नहीं। आप अपने अंश को पिता बन जीवन में प्रथम सहारा दे रहे हैं, इस अविस्मरणीय सुखद पल का आनंद लें। इसी पल के लिए आपने और आपकी पत्नि ने बेसब्री से इंतजार किया है।

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3- शिशु के जन्म पश्चात पिता की जवाबदारियाँ।

शिशु के जन्म की आपको हार्दिक बधाईयाँ। आप पिता बन गए हैं। गर्व और उल्लास के इस क्षण में ध्यान देने योग्य बातें –

  • हस्तक्षेप ना करें-
    जन्म पश्चात बाल चिकित्सक नवजात की प्रारंभिक सेवा में लग जाते हैं, जैसे, उसकी श्वास, धड़कन इत्यादि की देखरेख। जन्म के ये शुरुआती पल अति-महत्वपूर्ण होते हैं। हो सकता है उसका स्वास्थ स्थिर करने के लिए उन्हें अतिरिक्त प्रयास भी करने पड़े जैसे नाक या गले में नली डालना, ऑक्सिज़न देना इत्यादि। इन दुविधाजनक पलों में संयम बनाएं रखें और चिकित्सीय प्रबंधन में हस्तक्षेप ना करें।
  • अपना तनाव और चिंता को अपने व्यवहार में ना आने दें, इससे सभी का ध्यान आवश्यक चीजों से भटकता है। अगर आप असहज महसूस कर रहें हैं, तो अल्प विराम ले लें। अभी प्रसव-सहायक आँवल निकाल कर योनिद्वार पर लगाए गए एपिसियोटॉमी चीरे को सिलेंगे और बाल-चिकित्सक शिशु को प्रारंभिक देखरेख प्रदान करेंगें। ये सभी गतिविधियाँ आपको भयभीत कर सकती हैं।
  • अपने शिशु की प्रारंभिक अवस्था और बाह्याकृति देख कर विचलित ना हों। हो सकता है वे चिपचिपे जैलीनुमा पदार्थ के आवरण में लिपटे हों, उनके माथे पर थोड़ी सूजन हो या फिर चमड़ी पर अत्याधिक सलवटें हों। यह सभी परिवर्तन आगामी कुछ समय में सामान्य हो जायेंगे।
  • अपनी पत्नि की हिम्मत और धैर्य की सराहना और आपके अंश को दुनिया में लाने के लिए धन्यवाद अवश्य करें। आप अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए ग्रीटिंग कार्ड, उपहार, चॉकलेट या लिखित संदेश का उपयोग कर सकते हैं। फूलों के प्रयोग से बचें, क्योंकि इससे शिशु को एलर्जी का भय रहता है।
  • अपनी पत्नि को शिशु को दुग्धपान करवाने, तद्पश्चात ढकार दिलाने, स्नान करवाने, डायपर बदलने इत्यादि में यथा संभव सहयोग करें।
  • पत्नि को सुगम और एकांत वातावरण प्रदान करने का प्रयास करें। जन्म के पश्चात प्रारंभिक कुछ दिन माँ एवं शिशु के मध्य सामंजस्य और स्तनपान स्थापित होने के लिए अति-महत्वपूर्ण होते हैं। नियमित आगंतुकों की उपस्थिति में माँ शिशु को पर्याप्त समय नहीं दे पाएगी।
  • प्रसव एक कष्टदायक प्रक्रिया है। शांत वातावरण आपकी पत्नि को आराम प्रदान करेगा।
  • प्रसव के दौरान किए गए अपनी पत्नि के व्यवहार पर किसी भी प्रकार से व्यंगात्मक या आलोचनात्मक टिप्पणी ना करें। इस अवसर पर वे भावनात्मकरुप से कमजोर होंगी और वे हीन भावना का शिकार हो सकती हैं। उनका उत्साहवर्धन करें।
  • शिशु के जन्म प्रमाण पत्र पर भरी गई सभी जानकारियों की पुष्टि स्वयं करें। तद्पश्चात उनमें परिवर्तन करना मुश्किल होता है।

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



Role of Husband in Labor Room
The journey of 10 cm through birth canal is the toughest journey that a human would undertake in its entire life.

It involves hard labor for all, may it be birthing mother, expectant father, waiting family or attending doctor/ midwife. The entire process of birthing is full of pain and uncertainty. The mother is in physical pain due to uterine contractions and cervical dilation, father in emotional pain after witnessing agony of his wife and birth attendant in mental pain due to fear of performance and outcome.And that is why, the entire process of birthing is popularly known as Labor Pains.

In fact, God has bestowed females the uterus to procure and give rise to progeny as they are physically, mentally and emotionally more stronger than males.

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As, the incentive of self-fulfillment, fame and money can drive a mountaineer climb the Himalayas, likewise, the eternal happiness of giving birth to a life, tender touch of newborn, melodious cry and satisfaction of nurturing the baby can help the parturient undertake this toughest journey with patience, perseverance and calmness.

In the delivery room, it’s up to Mom to do all the pushing, but Dad plays a big role in the birthing process too. Time and over it has been proved beyond doubt that the presence of her husband may further help her to win over this unpleasant situation with a smile and confidence.

The presence of husband during birthing –

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  • Gives confidence to the parturient,
  • Relieves her pain,
  • Reduces duration of labor.
  • Aid in decision making in case of any intervention required.
  • Help build bond between newborn and father.
  • Creates and increases husband’s respect for his wife, after seeing the amount of pain and agony that she bears to bring their progeny into this world.

Hence, now world over, the presence of husband is encouraged in the labor room. They may even be allowed to cut the umbilical cord and receive their baby.

Few tips to help husbands undertake their journey in labor room with success –

1- Preparation starts during pregnancy before labor pains!

A- Discuss birth plans with your wife and her Doctor.

  • Pros and cons of normal vaginal birth and caesarean delivery. Probability of either of two in your wife’s case.
  • Availability, expertise, standard operative protocols (SOPs), benefits and disadvantages related to ventouse or forceps delivery, in case the need arises.
  • Epidural labor analgesia versus medical management for pain.
  • Need and availability of Pediatrician, NICU, blood bank etc.
  • Discuss regarding your presence in the labor room.

B- Pack your Emergency bag in anticipation to avoid last moment rush.

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• Emergency fund, insurance policy, contacts details etc.
• Keep Snacks, Oral rehydration solution, water bottle etc to avoid starving long when you are waiting in labor room. (Do not offer anything to eat/ drink to your wife without the permission of the birth attendant. In case of emergency caesarean delivery, at least 4 to 6 hours fast is recommended.)
• Books, magazines, laptops etc. – Childbirth may take a long time. So, these can help you spend your time and keep yourself calm.
• Additional bed sheet or blanket for yourself and wife.
• Discuss the availability of baby cloths, toiletries and diapers in hospital with your caretaker or keep them ready in your emergency bag.
• Camera- The smile of newborn is a blessing. Don’t forget to capture this beautiful moment in your camera. However, do not disrupt her privacy or interfere in the management of labor.

C- Stem cell banking:
In case you have opted to preserve the stem cells or cord of your baby, do not forget to carry the kit to labor room and inform the collection personnel about the admission of your wife in labor room.

2- During birth – She needs her life partner most in this crucial time!

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She is about to deliver your progeny. Be her partner not just on papers, but truly in her life at this crucial time. She needs you most.
Support your wife in all ways- physically, mentally, emotionally and psychologically, as she goes through a nerve-racking process of birthing. Don’t panic and neither allow her to?
However, if you are a type ‘A’ personality who panics at little stimuli, do not enter the labor room; else, you may worsen the situation more. There should not be any guilt if you cannot stay in labor room. Your moral support and your presence outside may also be a great help!

a- Be a Bridge-
When the labor pains begin; due to agony, your wife may become non-receptive to the advice and instructions from the birth attendants. You can play a crucial role by bridging this communication gap.
If required, discuss with the doctor about labor analgesia to relieve her pain. But, do not press the panic button that may unnecessarily lead to caesarean delivery. However, if the labor isn’t going smoothly, your wife might need an intervention that she hadn’t signed up for, such as pain medication or even a cesarean section. So, be prepared for changes in plan.

b- Be a Cheer leader –

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  • Hold hands, pat on back, give light massage, share the memories and discuss future plans etc to divert her mind from the situation.
  • Light music, gossip, labor video or story telling may distract her and help a lot.
  • Encourage her to write a letter or record a message for the newborn. This would not only let her express her feelings and relieve her stress, but also after years when the child would go through these messages, he would develop more regards for his parents for being so sensitive for his birth.
  • Make eye contact with her. Reassure her that she’s doing a great job and each contraction is one contraction closer to the birth of your baby.
  • Let her know that you love her and you understand her agony completely.
  • Though some women don’t like to be touched during labor, others appreciate a neck or back rub.
  • Your role as a calm and confident husband can boost her morale.
    However, do not panic looking at the weird instruments and their use, repeated internal examination or breaking water bag. Do not interfere in the management of labor.

c- Be a Support –

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  • You can help your wife move around for toilet or help her do light exercises that are advised.
  • Help her find comfortable position – upright, walking about or kneeling forwards during contractions, resting between them etc.
  • Fan her if she is hot, Put a cool face washer on her forehead or neck if she is hot or nauseous, Get extra blankets and massage her legs if she has chills.
  • Hold her legs up and out; when she is asked to bear down to push the baby out of the vagina.
  • Ask her to bear down when there are strong contractions and take deep breath when the uterus relaxes.
  • You can look down and see your baby’s head coming out. Your words of assurance that there definitely is some progress with her pushing can further encourage her.

d- Be patient –

“Women in labor can be more sharp-tongued than usual, so try not to take it personally.”

e- Be a Father –

You would probably get the opportunity to cut the umbilical cord and thus officially bring your baby into this world as a separate human being. Enjoy this proud moment as a Father, for which you and your wife has desperately waited so long.

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3- After Birth!

Heartiest congratulation to you for becoming father! But remember –

  • Do not interfere.
    Immediately after birth, the receiving Pediatrician would stimulate the baby to cry as it helps in lung expansion and breathing. They may use a vigorous massage, suction catheter, Oxygen bag and mask or may be Tracheal tube some times, if required. First few minutes are very crucial for the establishment of baby’s oxygenation. Please do not interfere in the resuscitation of the baby.
  • Do not show apprehension as it may distract their attention. If you feel distressed, leave the labor room for some time. As now, the Obstetrician/ midwife would deliver the placenta out of womb and stitch the episiotomy, if given and the Pediatrician would resuscitate the baby. Both the actions can horrify you.
  • Do not alarm at your baby’s appearance. Initially they may be covered with a jelly like material, have some swelling on their head & face or wrinkles all over their body. It may all settle in next few days.
  • Appreciate your wife for all her efforts and show your love by writing a note or gifting her pack of chocolates. Avoid flowers or other sprinkled gifts as it may lead to allergy to baby.
  • Be a helper – Help her in breast feeding and burping the baby, changing diapers, make them sleep etc.
  • Provide comfortable and isolated atmosphere. Initial few days after birth are very important for the establishment of lactation and bond between mother and baby. So don’t have all your friends and family rush in right after the birth as it may interfere with same.
  • Help her take rest. The process of birthing is very tiring and energy consuming. Appreciate and motivate your wife for all her efforts throughout the pregnancy and in labor room.
  • Do not pass loose comments or make fun. Your wife might have behaved weirdly during the labor pains. She might also have developed inferiority complex for her performance. She is emotionally labile. So any loose comment or replay of her actions may shatter and hurt her.
  • Be a support even if she had chosen to undergo Elective caesarean delivery to avert the risk to her baby or avoid agony of pain, otherwise she may suffer from sense of inferiority or guilt that she did not have courage to undergo vaginal delivery.
  • Ensure that the information on birth certificate is correct.

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. Atmost care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.