16 सप्ताह – शिशु की आँवल बड़ी जवाबदारियों के लिए तैयारी कर रही है। (16 weeks – Placenta should get ready for bigger role!)

16 सप्ताह – शिशु की आँवल बड़ी जवाबदारियों के लिए तैयारी कर रही है। (16 weeks – Placenta should get ready for bigger role!)

16 weeks (2)

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आपका शिशु अभी लगभग 12 सें.मी. लंबा और संभवतः 100 ग्राम वजनी होगा।

शिशु की बढ़ती आवश्यकताओं की पूर्ती हेतु इस 16 से 18 सप्ताह की गर्भावधी के दौरान आँवल में अतिमहत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं – अतिक्रमण की द्वितीय लहर के माध्यम से आँवल द्वारा माता की गर्भाशय की माँसपेशीय रक्तधमनियों को भेद जड़े बनाना। इसके परिणामस्वरुप आँवल एक निम्न दाब और निम्न प्रतिरोधक तंत्र में परिवर्तित होती है जिससे शिशु को निरंतर, अनुवरुद्ध, पर्याप्त रक्तापूर्ति हो सके।

आँवल विकास की इस प्रक्रिया में त्रुटि के परिणामस्वरुप ही  गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप, शिशु को अल्प रक्तापूर्ति और गर्भ में शिशु की आकस्मिक मृत्यु जैसी अवांछनीय दुर्घटनायें होती हैं। यह प्रक्रिया अनियंत्रणीय है, किंतु उच्चकोटी के प्रोटीनयुक्त पोषण, कैल्शियम सप्लीमेंट्स्, भरपूर जल ग्रहण, तनाव कम करने के उपाय, चिकित्सक द्वारा सुझावित दवाईयों के उचित सेवन इत्यादि गर्भावस्था की जटिलता को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

आपके शिशु का विकास अब अधिक तेजी से होगा। अगले 4-5 सप्ताह में वह वर्तमान वजन का तीन गुना प्राप्त कर लेगा। अतः पौष्टिक भोजन ग्रहण करें, नियमित व्यायाम एवं ध्यान करें और पर्याप्त विश्राम करें जिससे शिशु के विकास में मदद मिल सके।

आपके शिशु की गर्दन और रीढ़ की हड्डियाँ और माँसपेशियाँ अधिक बलवति हो गई होंगी जिससे वह अपनी गर्दन और शरीर को सीधा रखने में सक्षम होगा।
उसकी हथेली की पकड़ और गटकने में सहायक प्रतिक्रियाऐं विकसित हो चुकी होंगी। अतः वह बाहरी दुनिया से अनभिज्ञ स्वयं का अंगूठा चूंसने में मशगूल होगा।
उसका श्वासतंत्र दिन-प्रतिदिन अधिक परिपक्व हो रहा है।

नसिका के नीचे, उसके ऊपरी होंठ के मध्य स्थान पर ‘फिल्ट्रम’ नामक सीधा खांचा विकसित हो चुका होगा जो ऊपरी होंठ को धनुष का आकार देती है। ये बनावट मात्र मनुष्य में देखने मिलती है और संभवतः क्रमिक विकास में अन्य जीवों के मुकाबले सूंघ-क्षमता पर निर्भरता में कमी के कारण नाक में आए बनावट के कारण उत्पन्न हुई होगी। यह चेहरे की संरचना के दौरान तीन खण्डों के मेल के परिणामस्वरुप बनती है। इसके दोष से कटे होंठ की विकृति उत्पन्न होती है।

आपके शिशु की चमड़ी का निर्माण प्रारंभ हो चुका होगा। वर्तमान में यह इतनी पतली और पारदर्शी होगी कि निम्न स्थित रक्तधमनियाँ के जाल को सरलता से देखा जा सकता है। चमड़ी के नीचे वसे की परत बनने में विलंब के कारण तापमान नियंत्रण अभी लेन्यूगो केश के अधीन होता है। चमड़ी को भूरा रंग देने वाली मेलेनासाईट्स् कोशिकायें नसों से होकर चमड़ी में अपना निर्धारित स्थान ग्रहण कर चुकी होंगी। ऊंगलियों के अंत पर नखून उत्पन्न होना प्रारंभ हो रहे होंगें।

शिशु का रक्तसंचार तंत्र अब पूर्णतः क्रियाशील है। उसका हृदय अब प्रतिदिवस लगभग 28 लिटर रक्त को प्रवाहित कर रहा होगा।
कन्या शिशु होने की अवस्था में उसकी अण्डकोशिकाओं में प्रारंभिक अण्डों की उत्पत्ति प्रारंभ हो चुकी होगी।

सूचना-

उक्त जानकारियाँ साझा करने का मूल मकसद आपके और शिशु के मध्य वात्सल्य प्रेमबंध विकसित करना है। ये जानकारियाँ वैज्ञानिक दस्तावेज़ों से प्राप्त की गई हैं। किंतु, प्रत्येक शिशु का विकास भिन्न गति से हो सकता है।




16 weeks – Placenta should get ready for bigger role!

Your baby measures around 12 cm from crown to rump and approximately weighs about 100 grams.

During this phase between 16-18 weeks of gestation, to meet the increasing demands of growing fetus, the placenta would undergo the most important event – Second wave of Invasion into the maternal blood vessels present in the uterine musculature (Myometrium). As a result the placenta is transformed into a low pressure, low resistance apparatus to ensure constant and adequate blood supply from mother to fetus.

Failure of this invasion has been postulated as a cause of Pregnancy Induced Hypertension, Maternal-placental-fetal blood insufficiency and sudden fetal demise. There is no way to regulate this process. But, high protein diet, calcium supplements, plenty of fluid intakes, stress management, prescribed medicines in high risk pregnancies etc. might influence the fetal blood supply, though high level evidences are still awaited.

Your baby would now grow at much fast pace achieving triple the weight in just another 4-5 weeks. So, take good nutritious diet, do regular exercise, meditate and take enough rest to help the baby grow.

Your baby’s spine and neck muscles are becoming stronger making its head upright and body straighter. The baby’s grasp and sucking reflexes might have developed, allowing the baby to hold hands together or suck its own thumb.

His respiratory system is becoming more advanced.

A vertical groove called the philtrum appears under your baby’s nose that is specific to human, giving her top lip its distinctive Cupid’s bow shape. It might have appeared due to evolutionary reduction is size of the nose as a result of lesser dependency on sense of smell against other animals. It is at philtrum where the three segments of the face meet. Its defect leads to cleft lip.

Your baby’s thin and translucent skin develops, through which the underlying blood vessels may be easily visible. The subcutaneous fat is not yet formed and hence the body temperature is maintained by the lanugo hair. The pigment cells called melanocytes that gives dark color to the skin migrate to the epidermal layer. The nails begin to form at the tips of fingers and toes as thickening of epidermis.

Your baby’s circulatory system is in full working order. Her heart is pumping about 28 litres of blood around her tiny body every day.

If your baby is a girl, then the primary follicles begin to proliferate in the ovary.

Disclaimer-

The purpose to share this information is to sensitize you to enhance the bondage between you & baby. This broad information is purely based on the scientific data collected. However, every child may grow at a variable pace.