24 सप्ताह – शिशु के पृथक जीवन की सर्वप्रथम संभावना। (24 weeks – Baby achieves earliest potential survival!)

24 सप्ताह – शिशु के पृथक जीवन की सर्वप्रथम संभावना। (24 weeks – Baby achieves earliest potential survival!)

24 weeks final

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आपका शिशु अभी 30 सें.मी. लंबा और 500 से 600 ग्राम वजनी है। उसके सभी अंग पूर्णतः विकसित हो चुके हैं और गति से कार्यात्मक परिपक्वता हासिल कर रहें हैं।

फेफड़ों में न्यूमोसाईट्स् कोशिकाओं द्वारा सरफेक्टेंट नामक रसायनिक पदार्थ का उत्पादन प्रगतिशील है। इस तत्व का आवरण श्वास यंत्र की आंतरिक भित्ति को वायुमंडलीय दाब के अधीन पतन से बचाकर फुले रहने में सहायता प्रदान करता है, ताकि फेफड़ों और रक्त के मध्य वायु का आदान-प्रदान सुगम हो सके। इसी के परिणामस्वरूप जीवनोपरांत शिशु माता से पृथक स्वयं का अस्तित्व प्राप्त कर जीवित रह सकता है। हालांकि, अभी भी पूर्ण सामर्थ्य प्राप्त कर सफल जीवन क्षमता विकसित करने के लिए उसे लंबा समय तय करना शेष है ताकि समयपूर्व जन्म की जटिलताओं से बचा जा सके।

मस्तिष्क के उच्चतर केंद्र तीव्रता से अपने आवंटित कार्यक्षेत्र विकसित कर रहें होंगें। विचारों को नियंत्रित करने और याद रखने की उसकी क्षमता का आरंभ हो गया है।

पियूष ग्रंथी के द्वारा उत्पादित वृद्धि हार्मोन (ग्रोथ हार्मोन) 24 वे सप्ताह पर शीर्षस्तर पर पहुँच, तद्पश्चात् कम होना प्रारंभ होता है।

सिर पर बाल प्रकट होंगें। किंतु मेलानिन नामक रंजक तत्व के अभाव में वे प्रारंभिक दौर में श्वेत रंग के होते हैं।

उसकी बालों की जड़ से स्वेद ग्रंथियाँ और सेबेशियस ग्रंथियाँ प्रस्फुटित हो रही होंगी। स्वेद ग्रंथियों द्वारा निर्मित पसीना जन्मोंपरांत शरीर के तापमान और इलेक्ट्रोलॉईट्स् को नियंत्रित करने में सहायक होता है।  जबकि सेबेशियस ग्रंथियों द्वारा निर्मित वसायुक्त सीबम त्वचा को हानिकारक तत्वों, धूल और संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करता है।

शिशु की प्रतिरोधक प्रणाली परिपक्व हो कर उसे संक्रमण और रोगों से लड़ने के प्रति सामर्थ्यवान बनाएगी। उसकी श्वेत रक्त कोशिकायें विशिष्ट कार्यक्षमता के आधार पर अब 5 उपप्रकारों में विकसित होंगी जैसे न्यूट्रोफिल्स्, लिंफोसाईट्स्, बेसोफिल्स्, ईयोसोनोफिल्स् और मोनोसाईट्स्।

उसका हृदय अब संरचनात्मकरूप और कार्यात्मकरूप से पूर्णतः विकसित है। हृदय विकार की शंका पर ‘फीटल ईको’ के माध्यम से विकारों को पहचानने का यह सबसे उपयुक्त समय होता है।

24 सप्ताह के पश्चात्, हलचल या करवट बदलने के दौरान आप नीचें कोथों और योनीमुख पर संचारित असहनीय पीड़ा का अनुभव कर सकती हैं। यह दर्द ‘राऊंड लिगामेंट’ नामक बंध जो कि गर्भाशय को कमर की हड्डी के उभार से होते हुए योनीमुख से जोड़ता है, के तीव्र संकुचन के कारण होता है। प्रकृति ने यह संरचना इस तरह बनाई है कि आपकी झटकेदार हलचल के तंज को ये बंध शॉक एबसारबर के रूप में झेल कर संभावित क्षति से शिशु को बचा सके। हलचल के दौरान सावधानी रखनें और गर्भाशय को सहारा देनें से दर्द से बचा जा सकता है।

सूचना-

उक्त जानकारियाँ साझा करने का मूल मकसद आपके और शिशु के मध्य वात्सल्य प्रेमबंध विकसित करना है। ये जानकारियाँ वैज्ञानिक दस्तावेज़ों से प्राप्त की गई हैं। किंतु, प्रत्येक शिशु का विकास भिन्न गति से हो सकता है।

24 weeks – Baby achieves earliest potential survival!

Your baby now measures 30 cms and 500- 600 grams.

Its organs are fully formed and functionally maturing fast. The surfactant production by pneumocytes increases. This chemical substance lines the air sacs, permit their inflation and prevent collapse due to high atmospheric pressure resulting in the earliest potential survival, if born. However, there is a long distance to travel before the full potential of viability is achieved and the complications associated with prematurity decreases.

The higher centers in brain are acquiring its specialized functions rapidly. The brain is capable of conscious thoughts and memory.

The growth hormone produced by the pituitary glands peak at 24 weeks and then decline.

The scalp hair appears. But, they are white now, due absence of colored pigment, Melanin. The outgrowth from hair follicles all over body forms appendages – sebaceous glands that would produce oily sebum to protect skin from dust and bacteria and sweat glands that would produce sweat to regulate the body temperature and electrolytes.

The baby’s immune system matures and empowers the baby to fight against diseases and infections. The white blood cells differentiate into 5 subtypes like neutrophils, lymphocytes, basophils, eosinophils and monocytes, each with distinct functions.

The heart is completely developed and fully functional. In case of suspicion, it is the right time to diagnose any cardiac abnormality in the baby with the help of 2-D Fetal Echo.

From 24 of pregnancy onwards, you may experience some sharp pain in your inguinal region radiating to vagina while getting up from bed or changing posture. It is due to the Round ligament contractions that act as shock absorbers to prevent the baby from sudden jerks. The Round ligament connects and supports the fundus of uterus to the bony prominence at sides of hip bone and then to the vagina. Nature has designed this beautifully to remind mother to avoid jerky movements. Gentle movements and support of uterus while changing posture may prevent the pain.

Disclaimer-

The purpose to share this information is to sensitize you to enhance the bondage between you & baby. This broad information is purely based on the scientific data collected. However, every child may grow at a variable pace.