33 सप्ताह – आपके शिशु का शीर्ष-मस्तक अनुकूल निम्नावस्था प्राप्त कर चुका होगा।(33 weeks- Your baby might be in Head-Down position now!)

33 सप्ताह – आपके शिशु का शीर्ष-मस्तक अनुकूल निम्नावस्था प्राप्त कर चुका होगा।(33 weeks- Your baby might be in Head-Down position now!)

33 weeks

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वर्तमान समय में आपका शिशु लगभग 44-45 सें.मी. लंबा और 1700 से 2000 ग्राम वजनी हो चुका होगा। तद्पश्चात् उसके वजन में औसतन 35-40 ग्राम प्रतिदिवस और फलस्वरुप आपके वजन में लगभग आधा किलो प्रति-सप्ताह की बढ़ोतरी होगी।

आपकी अतिरिक्त पोषण की आपूर्ति हेतु आपको नियमित अंतराल में पर्याप्त पोषण ग्रहण करना चाहिए। शिशु की अस्थियों की सुदृढ़ता के लिए आपको समोचित कैल्शियम लेना चाहिए।

शिशु के मस्तिष्क के निरंतर विकास और कपाल की अस्थियों में कैल्शियम संग्रहण के साथ ही उसका सिर अन्य शरीर के अनुपात में अधिक वजनी हो जाता है। इसी के परिणामस्वरुप शिशु जो अब तक ब्रीच (नितम्ब नीचे और मस्तक ऊपर) अवस्था में था, अंतिम कुछ सप्ताह में गोल घूम कर नार्मल वजायनल प्रसव हेतु अनुकूल सिफेलिक अवस्था (वह अवस्था जिसमें शिशु का मस्तक श्रोणीगुहा में निम्नस्तर पर हो) प्राप्त कर पाता है।

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हालांकि, कपाल पर स्थित फोंटानल्स (जोड़ जहाँ कपाल की विभिन्न अस्थियाँ मिलती हैं) जन्मोंपरांत तक कैल्शियम संग्रहण के अभाव में कोमल और लचीली बनी रहती हैं। प्रकृति ने संभवतः यह सुविधा इसलिए की होगी ताकि,

  • मोल्डिंग नामक प्रक्रिया के माध्यम से कपाल-अस्थियाँ एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने से कपाल का व्यास कम हो सके और प्रसव के दौरान शिशु का सिर सीमित योनिमार्ग से सुगमता से बाहर आ सके।
  • प्रसव-प्रक्रिया में योनिमार्ग से निष्पादन के दौरान शिशु के मस्तक को क्षति से हुई अंदरूनी सूजन और दाब से कोई दुर्भाग्यपूर्ण हानि ना हो।

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अब तक शिशु की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी होगी। जन्मजात प्राथमिक सुरक्षा प्रणाली के दो घटक होते हैं। माँ के रक्त या दूध से प्राप्त IgG उपप्रकार शिशु को प्रारंभिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। वहीं जन्मोंपरांत रोग या टीके के माध्यम से शिशु स्वतः सक्रीय प्रतिजनों का निर्माण करता है।

गर्भावधी के साथ शिशु के आकार में वृद्धि के संग ही ऐम्नियोटिक द्रव्य की मात्रा में अल्पता आती है, जिसके फलस्वरुप शिशु की हलचल सीमित हो जाती है। किंतु बिलकुल भी हलचल महसूस ना होने पर तुरंत ही अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

शिशु के विकास के साथ ऐम्नियोटिक द्रव्य की मात्रा में अल्पता को प्रकृति ने सोच-समझ कर रचित किया होगा ताकि,

  • गर्भाशय की सीमित जगह में विकासशील भ्रूण को समायोजित किया जा सके।
  • गर्भाशय और पेट में अधिक खिंचाव के कारण माँ को पीड़ा ना हो।
  • ऐम्नियोटिक द्रव्य की अल्पता के साथ ही शिशु का मस्तक श्रोणि-गुहा में प्रवेश कर सके।

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आपका शिशु अभी श्वास लेने और गटकने का अभ्यास करने में मग्न होगा।

उसके कोमल लेन्यूगो केशों का स्थान अब वास्तविक कठोर केश ले रहे हैं। उसके नख अब ऊंगलियों के छोर तक विकसित हो चुके होंगें। हो सकता है कि जन्म के पूर्व ही वह अपने नखूनों से खुद को नोंच ले।

शिशु के आकार-वृद्धि के परिणामस्वरुप विकासशील गर्भाशय द्वारा आंतों और डॉयाफ्रम पर दाब पड़ने से आप कम भूख लगने या श्वास् लेने  में असुविधा का अनुभव कर रही होंगी। हांलांकि 36 सप्ताह की गर्भावधी के पश्चात् जैसे ही शिशु का सिर श्रोणी-गुहा में प्रविष्ठ करता है, दाब कम होने से आप सहज महसूस करेंगी।

सूचना-

उक्त जानकारियाँ साझा करने का मूल मकसद आपके और शिशु के मध्य वात्सल्य प्रेमबंध विकसित करना है। ये जानकारियाँ वैज्ञानिक दस्तावेज़ों से प्राप्त की गई हैं। किंतु, प्रत्येक शिशु का विकास भिन्न गति से हो सकता है।



33 weeks- Your baby might be in Cephalic (Head-Down) position now!    

Your baby might be around 44-45 cms long and weigh 1700 – 2000 grams. They may henceforth gain 35-40 grams per day as a result of which you may gain around half a kilo per week. As there is higher calorie requirements for both of you, kindly eat good nutritious food at frequent small potions. Adequate calcium intake is extremely important for the developing bones of baby.

As the baby’s brain continues to grow larger than rest of the body and there is deposition of calcium in the scalp bones, its head becomes heavier and favors head-down position that is favorable for vaginal delivery. So, the baby who was in breech position (buttocks down) until now, acquires vertex (head down) position.

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However, the fontanels (junctions where scalp bones unite) remain un-calcified, soft and pliable until quite some time after birth. The nature has thoughtfully designed it so as to facilitate-

  • Moulding (overlapping) of bones that reduces the diameter of fetal head and allow easy passage through bony pelvis during birthing.
  • Prevent rise in intracranial pressure in case there is some swelling in brain due to untoward injury during birthing.

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By now, their immune system is optimally developed to offer protection against harmful bacteria and viruses. The innate or natural immune system has two components. The passive immunity is offered by the Mother’s IgG subtypes antibodies that traverse through the placenta and milk to reach the baby. The active immunity would gradually develop with the exposure to infection or immunization after birth.

As the baby grows large and amniotic fluid decline, the fetal movements are restricted. However, if you fail to perceive them for quite a long time, kindly contact your Doctor. The nature has designed fall in amniotic fluid in third trimester with growth of the baby so as to,

  • To accommodate the growing fetus in limited uterine space.
  • To prevent discomfort to the mother due to over distension.
  • To facilitate decent of fetal head gradually to prepare for birthing.

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The baby is busy practicing breathing and swallowing.

The soft thin lanugo hairs are replaced by thick actual hair. The nails are now long enough to reach the tip of fingers. They may scratch their face even before birth.

You may experience discomfort in breathing and while lying down due to pressure over the diaphragm by the growing uterus. The pressure over the intestines may lead to loss of appetite or early satiety. However, this would gradually get better after 36 weeks with the decent of fetal head into pelvic cavity.

Disclaimer-

The purpose to share this information is to sensitize you to enhance the bondage between you & baby. This broad information is purely based on the scientific data collected. However, every child may grow at a variable pace.