6 सप्ताह – बधाई हो, आपके शिशु की धड़कन आ चुकी है। (6 weeks – Hurrah! The baby’s heart has started beating!)

6 सप्ताह – बधाई हो, आपके शिशु की धड़कन आ चुकी है। (6 weeks – Hurrah! The baby’s heart has started beating!)

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हार्दिक बधाईयाँ, आपका शिशु अब 6 सप्ताह का हो गया है।

आपके शिशु के हृदय की धड़कन आ गई है, और इसे स्पष्टरुप से सोनोग्रॉफी में भी देखा जा सकता है। हृदय शिशु का क्रियाशील होने वाला पहला अंग होता है और उसके जीवन की कुशलता का प्रमाण भी।

हालांकि, अभी उसका हृदय मात्र पाईप समान ही विकसित है और थोड़ी मंद गति (100 धड़कन प्रति मिनिट) से ही धड़केगा। किंतु शीघ्र ही यह व्यस्क हृदय का पूर्ण आकार लेकर संपूर्ण गर्भावस्था में 110 से 160 प्रति मिनिट की गति से धड़कने लगेगा।

अब शिशु की तीनों जननशील परतों से अन्य अंग भी विकसित हो रहे हैं।

  • बाहरी एक्टोडर्मल परत से मस्तिष्क, नाड़ी तंत्र, चमड़ी और उसके सहयोगी भाग विकसित होना प्रारंभ हो गए हैं।
  • मध्य मीसोडर्मल परत से शरीर के सहायक अंग जैसे माँसपेशियाँ, हड्डी, गुर्दे (किडनी), हृदय की माँसपेशी, आहार तंत्र की पेशी और रक्तकोशिकायें इत्यादि विकसित होना प्रारंभ हो गए हैं।
  • भीतरी एण्डोडर्मल परत से हृदय, रक्त धमनियों, फेफड़ों, अंतःस्त्राव (हार्मोन) बनाने वाली ग्रंथियों और जननांगों इत्यादि की भीतरी झिल्ली का निर्माण हो रहा है।
  • शरीर के मुख्य भाग से ऊपरी और निचले अंग (हाथ और पैर) प्राथमिक शाखा के रूप में विकसित होने लगते हैं।

आपको यह अचरज हो सकता है, कि गर्भावस्था के इतने प्रारंभिक दौर में ही आपके चिकित्सक ने सोनोग्रॉफी करवाने के निर्देश क्यों दिए हैं। किंतु इसकी अपनी महत्ता  है।

  • स्थान पता करने – शिशु गर्भाशय के भीतर ही विकसित हो रहा है, या फिर असमान्य स्थान पर। अस्थानिक (एक्टोपिक) भ्रूण की अनचाही परिस्थिति माँ के लिए प्राणघातक हो सकती है, अतः इसे यथाशीघ्र ही उपचार करना चाहिए।
  • भ्रूण की संख्या के लिए– गर्भाश्य में एक या उससे अधिक गर्भ का पता लगाया जा सकता है। और उनके मध्य उपस्थित भित्ती की प्रवृत्ती के माध्यम से उनके भ्रूणावरण संबंधित गुणों का पता लगाना संभव होता है।
  • शिशु की जन्म तारीख निर्धारित करने के लिए – शिशु के शीश से कमर तक (Crown Rump Length -CRL) के माप के माध्यम से उसके संभावित जन्म की तारीख का अनुमान 4 दिवस की सीमा में संभव होता है।
  • जीवन का प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए – शिशु की धड़कन की उपस्थिति उसके जीवन का प्रमाण होता है।
  • गर्भाशय के अन्य विकार का पता लगाया जा सकता है।

सोनोग्राफ़ी पूर्णतः सुरक्षित है, आपके शिशु को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाती है।

  • अगर आपके शिशु की धड़कन अभी नहीं दिख रही है, तो भी हतोत्साहित ना हों। हो सकता है कि उक्त माह में अण्डोत्सर्ग और निषेचन विलंब से हुआ हो और हृदय अभी विकसित होने को हो। ऐसे में आपके भ्रूण कोष और उसमें भ्रूणांश की उपस्थिति, अण्डकपीत कोष (यौक सेक) की सकुशलता इत्यादि महत्वपूर्ण होते है। आपके चिकित्सक ऐसे में आपको पुनः कुछ दिवस पश्चात शिशु की सकुशलता सुनश्चित करने के लिए सोनोग्रॉफी के लिए बुला सकते हैं।

इस दौरान आप जी मचलाना और मतली का अनुभव कर सकती हैं। मुख्यतः इसका कारण ह्यूमन कोरियोनिक गोनेडोट्रॉपिन नामक हार्मोन होता है। किेंतु, संभवतः प्रकृति ने यह लक्षण इसलिए दिया होगा, ताकि माता भूलवश ऐसी किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन ना कर ले, जिससे शिशु को हानि हो सके।


Diet in Pregnancy

Exercise in Pregnancy

सूचनाः

उक्त जानकारियाँ गर्भावस्था और शिशुपालन संबंधित विषयों पर सामाजिक जागरुकता पैदा करने हेतु साझा की गई हैं, ताकि, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर माँ एवं शिशु मृत्यु दर कम की जा सके। लेखक द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया गया है, कि दर्शाई गई जानकारियाँ प्रामाणिक स्त्रोत्र से सही प्राप्त की गई हों। हालांकि उन के पालन से पहले अपने स्वास्थ अधिकारी से अवश्य चर्चा करें। 



Your baby is 6 weeks old – Hurrah! The baby’s heart has started beating!

Your baby’s heart beat has begun and can be well marked in ultrasonography. It is the first organ to function and confirms the life.

Even though the heart is simply a tube at this stage and beats @ 100 beats per minute, soon it would take a structure of adult heart and beat @ 110-160 bpm.

The cell of three germ layers continue to grow and differentiate into various organs.

  • The outer ectodermal layer will soon form your baby’s brain, nerve tissue, skin and its appendages.
  • The middle mesodermal layer would form heart muscles, connective tissue including muscles and bones, kidneys, walls of gastro-intestinal tract, blood cells etc.
  • The inner endodermal layer would form inner lining of its heart, blood vessels, lungs, genitals, intestinal tract and hormone producing glands etc.
  • The upper and lower limb buds starts projecting from the body.

You may often wonder, why your Doctor has advised you an ultrasound so early in your pregnancy, but it has its significance.

  • Location Scan: It determines the location of the developing fetus. Its normal position is Intrauterine cavity. If it implants outside the cavity, it is called as Ectopic Pregnancy and is a life threatening condition. It needs urgent action.
  • Number of Fetuses: Presence of multiple gestational sac suggest multi fetal pregnancy and appearance of their connecting membranes and placenta may indicate the nature of twinning.
  • Dating Scan: The expected date of delivery can also be estimated by the Crown Rump Length (CRL) measurement within the range of +/- 4 days.
  • Viability Scan: The presence of fetal heart beat is the most accurate sign of fetal viability.
  • Presence of any abnormality in uterus that can adversely affect the developing fetus can be noted.

The ultrasonography is absolutely safe and do not harm the baby.

  • If your baby’s heart beat could not be localized, Don’t Panic. It may be a delayed conception and your Doctor may call you again for a repeat USG to confirm fetal viability. At this time the turgosity of gestational sac, presence of fetal pole and appearance of a good yolk sac should reassure you and your doctor.

You may experience Morning Sickness and Vomiting. The most common cause of it is the rising levels of Human Chorionic Gonadotropin hormone in your blood. However, the nature would have designed it so that you do not consume any harmful food that can adversely affect the baby.

Diet in Pregnancy

Exercise in Pregnancy

Disclaimer:

The information is shared to create awareness towards Pregnancy and Childcare to reduce maternal and child deaths. At most care has been taken by the author to include the verified information from authentic sources. However, kindly discuss the same with your health care provider before implementation.